रोहीडे रा फूल | Rohidai Ra Phool

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Rohidai Ra Phool by डॉ. मनोहर शर्मा - Dr. Manohar Sharma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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राग सी एक जगा भोतत घण लोगा री भीड़ मु सीजी रै निजर पडी । इतरा मोटधार एक जगा नेठा क्यू हुय रैया है * मु सीजी रे कुतूहल हुयो श्र ब नेड सी जा पूग्या । पथ स्याणा हा, मुसीजी भीड भेठा नी हुया श्रर टूर खड़ा ई सारो तमासो देख्यो । जल्दी ई मु सीजी री समभ माय पूरी बात झायगी के आरा ता मोटधारा रो दौड़ हुय रयी है, जिया घोडा री भी तो दौड़ हुया कर है । इसी दौड मुसीजी घणी इ देखी ही परा भ्रा दौड़ यारी ई ही । सकडो सा रस्तो हो । दोनतू कानी मकान अर दुकान री लामी कतार ही । आरा दौड मैदान मे न हुयर बजार मे हुयरी ही । दौड़ सातर वजार वद कर मेल्यो हो झथवा लोग डरता भ्राप ई सडक छोड दीपी ही । मडक इतरी सी चोडी ही क॑ एक सीध में बीस पथ्चीस नेडा भागरिया खड़ा हुय सक 1 पण अठ तो हजारा मागणिया हा अर ब दुर दूर सु झाया हा । दो ग्रफसर सडक र बीच मे मोटी डोरी ताण राखी ही झर उणय र एवं कानी सारी भीड भेली ही । झागलो नाकों क्यु दूर हो पणा दीख हो । बठ भी दो अफसर डोरी पकड्या खडया हो । वा र गल ने हार-जीत रो निणय देखशिय लोगा री एक दूसरी भीड खड़ी ही । मु सीजी एक ऊची सी दुकान दंखर श्रागल नाक खड़ा हुयग्या, जिंणसू सारो तमासो भली भात देरयो जा सक । आाखर दौड़ सरू हुई-एक, दो, तीन । सारी भीड सकडी सडक पर एक सांग तीन री बाली सुशता इ सपाट भागी 1 है राम, झा के दौड़ ? दौड़ सह हुवता ई इसी घकापल माची के बिचारा झाघाक मागणिया तो सडक पर पडगा अर चिथगा । किणी रो हाथ ट्रट्यो श्र किसी रो पग । वई बेहोस हुयग्या श्र कई जाण ला मे गाह्मा गया । मागरिपिया एक ई विचार कोनी बरथो व पगा तठ मिनख शरीर है श्रर ब लाथ ज्यु पड्या सिसक है । आप री जीत री बाजी कुण छांड ? कई जणा पड्या, जद ई तो ब झाग बढ़ा । भरा सो बा री पलों जीत ही । मार्गाणया मोट्थार पडचोड जुवाना कानी कोनी देस्या तो तमासू लोग भी बा र क्यु ई श्राड कोनी आया--जे इतरो ई दम दो ता ब दोड म झाया इ क्यू ?




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