धरती के देवता | Dharati Ke Devata

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
200
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)२१
कटवा दी ) काम वन गया । ठीऊ है ठीक है, देखता हँ--यह तो
फरना ही पड़ेगा ।” पटवारी फिर बोले-हों, आपको इससे
फितना रुपया लेना है ह
“यही कोई पन्दरद् सी ।” घनराज बोला !
बनराज का हाथ दात्र कर पटवारी बोले--“आपने भी
कमाल कर टिया सेठ साहेव । यह तो क्या, इसके वेटे के वेदे भी
नहीं चुका सेंगे। लेकिन इस साल आपने हमारे साथ
पाल चली--प्रा हिस्सा नहीं दिया और जो देने का वायदा
जिया सो अभी तऊ जेप में नहीं आया |
भडसके लिए आपको परयराने की जरूरत नहीं है, पटवारी
साहेब | आपके लिए रुपए जया, ससरी जान हाजिर है 1
“गही तो आप लोगों मे सासियत हें--जान हाजिर कर
#गे, दाम हाजिर नहीं करेंगे ।” इतना कर पठचारी ही-ही करके
हसमे लगे।
इतने ही में पुन था लेकर आ गया। सेठ ने गरज फर
फटा -'श्रो काठ के उल्लू । तुमे पानी लाने के लिए कहा था
न । पहले चा ओर पीछे पानी, उल्टे फ्हीं के, काम चोर ।!”!
सेठ जी, में क्या करूँ? सिठानी जी मे मना कर दिया
था | वोलीं--पानी फ्यों पियेंगे, चा पियेंगे पटवारी साहेन।
सापरदार, जो पानी दिया । सो में क्षप ग्ह गया ।'
“अच्छा, '्न्छा, मारो गोली पानी को, चलो 'अय चा दी पी लें।
जारेजा, फाम कर अपना । हों, जरा पूरियों नरम मरम सिक््याना;
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