काव्य - कानन | Kaavya Kaanan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
44.15 MB
कुल पष्ठ :
404
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ १ देव सबे सुखदायकें संपंति संपवि सोई जुं दंपविं जोरी । दंपति दीपतिं प्रेम प्रतीति प्रेतीति की प्रीति संनेह निचोरी ॥ प्रीति तहाँ गुन रीति विचार बिचार की बानी सुंधारस बोरी । बानी को सार बखानों सिंगार सिंगार को सार किसीोर-किसोरी ॥
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