गूंगी मछलियाँ | Goongi Machhaliyan

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : गूंगी मछलियाँ  - Goongi Machhaliyan
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about विनोद रस्तोगी -- Vinod Rastogi

Add Infomation AboutVinod Rastogi

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
क्स्त्रो अनूप रधिया झनूपरधिया :अनूप रधिया झनूपरधिया'रधिया भ्रनूषरघिया :अनूपधनूपरधिया पझनूपशधिया: (खुककर अभिनय को मुद्रा में) यत्त माई लेडी ! £ (हँसकर) तुम बिल्कुल नही बदले 1 ४ गमिरगिट की तरह रंग बदलने वाले और होते हैं, रधिया ! अनूपतो कारी काँवरि है जिस पर दूसरा रग चढ़ हो नहीं सकता। (रघिया हेसती है ।) कहाँ है मनोज का बच्चा ? कचहूरी गए हैं। श्राते हो होगे ।: दोस्त के लिए एक दिन कचहरी नहीं छोड़ सकता ! मेरा तारनहीं मिला था क्‍या ?ै४ कोई जरूरी मुकदमा था । तुम बेठो आराम से। मैं श्रभी चायबनाती हूँ ।: चाय मैं पीकर भाया हूँ । : कहाँ से । : स्टेशन से । वहीं सामान छोड़ झाया हूँ । (सोफ़ पर बेठकरसिगरेट सुलगाता है।): क्यों ? सामान स्टेशन पर क्‍यों छोड़ भाए ? : क्रूरी काम से बनारस जा रहा हैं । मनोज से मिलने के लिएही रुक गया । लेकिन तुम तो तीन बजे श्राने वाले थे ।४ गाड़ी लेट भ्राई तो मेरा कया कसूर ? रधिया :लेकिन भैया, ऐसी मेहमानदारी भी क्या ? बरसों के धाद आए हो । बाबूजी के ब्याह में भी नहीं भ्ाएं। और भ्रव***४ वापसी में रुकूंगा दस-पाँच दिन । तव जी भरकर खातिरदारीकर लेता । हाँ, यह्‌ तो बताओ, तुम्हारी बहू रानी कौसी हैं ?: बहुत भच्छी । रूप भौर गुन दोनों की खाद । ४ तब तो मनोज खूब चाहता होगा उन्हें ॥ (रधिया सौन रहतीहै) बोलती वयों नहीं ?४ भव क्या बताऊँ, भैया ! उनके घ्िर पर तो मीना का भूतअब




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now