अथ प्रतिक्रमण की विधि भाग 1 | Ath pratikaran ki Vidhi

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
430
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(७)
वन््दोजैनवरम् ॥
५८८४४ टाइप पा 27:< 7%%<%के% अथ ग्रतिकरमण प्रारमेञ22% 20297४::#72 12%:् )25अथ इच्छामिण मंते का पाठ ॥ १॥ -
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इच्छामेणं संत तुब्भेहि अमणुणायसभाणे देवासेय पढ़िकमण
ठाएमि, देवसियंणाण दंसण चरित्ताचरित्त तप अतिचार चित
णाथ कोमि कौउस्सरग | ,
थ .इच्छास ठाम का पाठ ॥ २ ॥इच्छामिं ठामि काउस्सरंग जो मे देवासिओं अइयारे कओ,
केाइओ, बाइओ, माणा[सेओ) उस्सुत्तों उमभ्गो अंकप्पो अकर-
णिज्ली दुज्शाओ दुर्घिचितिजों अणायारी आंगेच्छियच्वो,अंसांवग
पाउग्गों नाण तह दर्सण - चरित्तार्चरित्ते सुप सामाइए तिन्ह
गुत्तोणं, चउन्हें कसायाणं, पंचन्हमंजुच्व॑याणं, तिनन््हे गुणंव्वयाण,
चरउन्हे सिक्खावयांणे, वार्संविंहस्स सावगधर्म्मरस ज॑ खीडये
जे विशहिये तस्से मिर्च्छामि दुकेद ॥' अर्थ आंगमें तिविहे का पाठे ॥ ३ ॥अभिमे तिविहे पंण्णत्ते तंजहां|सुत्तागमे अत्थागम तदभयागमे
एहवा श्री ज्ञान के विषे जे कोई अतिंचार छागो होय ते आंलोर्ड
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