ग़दर पार्टी का इतिहास | Gadar Party Ka Eitihas

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
226
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)दौगान सोसायटी' कायम कौ गई जिसका उदहू कय धामिक छिक्षा
सम्जन्धी तथा सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देता घा। इस सोसायटी
से २५,० डाप्तर से बैनकोवर में गुझ्यारे का निर्माण कराया । इसी
तरह बिबटोरिया (कनाडा) में सत तेजासिह ने गुद्शारा बतवाया |
सगभग इसो समय श्री ज्वालासिह ठटिटियाँ प्रौर घत विसासासिह्ृ
दवेदर मे पुरपार्थ से धमेरिका में पैसिफिक कोस्ट ख्ाससा दीबान
सोसायटो स्पाविस को गई। संटाकल (कैछेफोनिया प्रमेरिका) में
गुर्थारा मनगाया गया । उम्व दाना सोसायटियां के उहू ए्य तो मिसले
जुसते थे पर दे सर्वषा एक दूसरे से स्वतत्र थीं। ये गुददारे सि गो के
घामिक-केन्द्र होते के प्रतिरिक्त अमे रिका-निवासी सभी भारतीय शमिकों
की सामाजिक प्रीर घाट में राजनैसिक जागृति के केस्द्र बने बयोंकि
कनाडा तथा प्रमे रिका-निबासी भारतीयों का हष्टिको संकीणे नहीं
भा। प्रस हत ग्रुर्वारों में कनाश वासी सभा ईसाई मिस्तरी भो
भाषण दिया करते थे।
इन केन्द्रों के प्रसावा श्री हरनामर्सिद काहरी साहरी' सीएटल
(5०७16 0 5.8) में सन् १९१ से विद्यार्थियों के सिए एक
योडिग हाऊस भौर वेनकोबर में भी एक छात्रावास तथा रत्रि-सूस
चलाते रहे ।
प्रारम्भ में प्रमेरिका से कनाडा गए भारतीयों ने भाभिक इष्टि ऐे
पर्याप्त उन्नति की । भारतीय जमता के जोवन-स्तर ण्गे देखते
हुए प्रमेरिका हो या कलाड़ा दोनां स्पानों पर गए भारतीयों मे
काफौ प्रगति की । भ्रमेरिका सथा कनाडा के स्वठन्त्र बाधावरण
में बहा के निवाध्तियों पर इस प्राविश उस्मति का प्रन््धा प्रमाव
भी पड़ा ।
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