हारीत संहिता | Harit Sanhita

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Harit Sanhita by कालीप्रसाद त्रिपाठी - Kaliprasad Tripathi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(१०) .._« हारीतसंहिता- ' विषय, : पृष्ठ, | विषय, पृष्ठ, दूतकक्षणोंका उपसंहार * : .... १९८ | ढुंंघित करनेमें अयोग्य रोगी ...... १६१५ शकुलवर्णेन'* .... ४ .». ४ | रवित करनेमें योग्य रोगी 9७० डक झुमहाकुनच ४ ,,० “' «»«» »$ | छ ग्रकारके रूंपन ०. (१६३ दुंषशकुंच .... 0... “० «« . १९५९ [विस्तकब्बरतक्षण,,.. ४ .... ». बुग[दिकोंका शकुन .»० ४ - | दोषपरत्वसे रूंघनकी मस्योंदा के यृगोंके संख्याका शकु .. ..., .. # दोषोंके कोपका पंकार॒. मोस्आदिकोंका शकुब -.. ».... # व्वरवालेको काथ देनेका समय ..... १६७ काथका प्रकार: .. 2 जूक सातग्रकारसे काथ देनेके समय कट औषधादि देनेके समयकी संज्ञा १६८ काथके सात अकार ्म्ड सांत अकारके काथोंका रक्षण...... » सात प्रकारके काथोंका कार्य .... . #.. काथरक्षणका उपदेश... बे # .#. काथसंबन्धी अनिष्ट छक्षण.. ...... 1१५. हीनकाथके लक्षण 1 99०० है का ह काकशकुन .... .... + »«४ . १६० जाहशशादिकोंका शकुन्‌ : ...... - , गसब समयक्रे.विविधपतद्यथंद्शन शक्कुन ,, शकुताध्यायका- उपसंहार ... .... १११ इति- द्वितीयस्थाने- समाप्तम्‌ ॥ अश्.. ललीयश्थानम । ओऔषघपरिज्ञानविधान “« ,.«/ - १६१ ज्वस्से उत्पन्न होनेवाके रोग .... “१६२ ज्वरसे उत्पन्न 'होनेवाले अन्य 3 2 उत्तम काथका लक्षण | «>«+ # प्रकारके-सैग.... “४ »,» “४ | बातज्वरमें पाचनकी विधि. .... . # दिमें शयन करनेसे होनेवाले रोग : ५, | पित्तज्वर और-कफज्वरमें पाचचकी मसहाभयंकर रोग कक ० हुई: |. विधि: *त+ 2 ताक जिले. ० काका स्वेव्याधियोंका- हेतु. २०» « 5 “9 -पाचनका निषेध .... ४ «० (७० बातादिदोषेंका पाचनकाक-' «० -# ' ज्वर्की मर्यादा .... “४ बज के - पांचनांदिक्रियाका समय ““ब «४ $ ज्वरंमेंपाचनादिदेनेकी मर्यादा... . ऊ.. घातुगतदोणेंका .पाचनकाल ......० /. १३४ 'काथके विपत्तिका प्रकार ..« पथ्यकी आवश्यकता ४४53 #««» छंघनका उपचार ..... «« “3 / 7 | ज्वरितको पथ्य मोजनका-उपदेश/ “ ,, रूंघनप्करण -०५..... ४>«०«०« ४ #- “ |मध्यलंघितकी अन्नविधि:- #« छू झुद्धलंघितका लक्षण : 7 5.2: ',, *,: | क्रमंशांतिकी-बिधि विज | अध्यमलंघितका -रक्षण. «३.६: ४ 7:: - | क्ाथ पीनेकी विधि हक अंतिलंधितका-लक्षण. «६.३: - १६५६: ज्वरचिकित्सा ४. इछकक हज कक - ; १ ७र ः




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