विश्व के प्रमुख संविधान | Vishv Ke Pramukh Sanvidhan

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Vishv Ke Pramukh Sanvidhan by इकबाल नारायण - Ikabal Narayan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अग्रेजी संविधान का विकास व स्वरूप & अग्रेजी सविधान के विकास के कुछ मुख्य स्तरो का विवेचन निम्न शीषकों के अतगत क्या जा सकता है । ऐुँलो सेक्‍ब्सन काल राजा का प्रादुर्भाव--प्रेट ब्रिटेत के राजपद का प्रादुर्भाव ऐग्लो सेक्सन लोगो के समय में सातवी व आठवी शताब्दी में हुआ। उस समय इगलड में अनेक छोटी छोटी जातियाँ थी । लोग गावों में छोट ोट समुदायों में रहते थे । प्रत्येक समुदाय का एक नेता हांता धा, जिसकी आज्ञा उस समुदाय के लोगो के लिए कानून होती थी। धीर धीरे शक्तिशाली समुदायों ने कमजोर समुदायों को जीता और इस प्रवार अत मे एक सवशक्ति सम्पन्न राजा का प्रादुर्भाव हुआ । वही कानून निर्माता होता था, वही मुख्य प्रशासक होता था और वही न्याय का स्नोत होता था । राजा का पद कभी वश परम्परागत होता था और कभी निर्वाचित 1 अवसर पड़ने पर राजा अपनी उस परामशदानी समिति को भी बुलाता था, जिसे “बिटनेजमोट' (५४1।४०8०11०1) अर्थात्‌ बुद्धिमानो की समिति कहा जाता था। इस समिति म॑ राजा के सम्ब वी, गाव के वयोवृद्ध लोग, चच के अधिकारी, सेना के कमचारी व सरकार के अय महत्वपूण कायकर्ता सम्मिलित होते थे । राजा समिति की बैठका का सभापति हांता था। समिति का मुख्य काय कानून बनाना, कर लगाना, अय देशों से साघ व समभौते करना, चर्चों के विशप लोगो की नियुक्ति एव पदच्युति करना आदि था। यह समित्ति अपील के सर्वोच्च यायाल्य के रूप में भी काय करती थी । इस प्रकार 'विटनेजमोट' का बडा प्रभाव होता था और वह कभा कभी राजा के मनमाने व्यवहार पर अकुश लगाने का काम भी करती थी । कभी-कभी तो वह इतनी शक्तिशाली भी रही कि उसने राजा वी नियुक्ति का भी काम किया । अनेक बार वह राजा को हटा देती थी ओर अनेक बार वह दूसरे राजाओ को गद्दी पर बेठाल देती थी। इसे हम सीमित अथवा वैधानिक राजतात्र के विचार का प्रारम्भ कह सकते है । पर समिति की यह शझतक्तिस्म्पन्नता अस्थायों ही रही । कालातर मे राजा अधिकाधिक शक्तिशाली होता गया और अपने मित्रो व सम्बाधियो को समिति का सदस्य बना-बता कर उसने समिति के सहत्व को समाप्त कर दिया। स्थानीय स्वशासत--सवधानिक हृष्टिकोण से महत्वपूण इस काल की दूसरी सफलता स्थानीय स्वशासन की स्थापना है । पूरा देश झायरोी (817०5) मे विभक्त था। शायर हण्डररेड्स (7701०१५) नाम के उपग्रदेशों मे विभक्त य॑ तथा हृष्डरेड्स गाव व शहरो मे विभक्त थे । प्रत्येक हण्डरेड मे एक स्थानीय सीमिति होती थी और प्रत्येक शायर मे एक शायरमृट होता था। गाव के लोग अपने सामान्य मसलो पर निणय करने के लिए प्राय विसी एक स्थान पर एकत्रित होते थे। -यायकाय चायर- मूदो के प्रमुखो व विशप लोगो के द्वारा किया जाता था। महान अल्फ्रेड (८६१ से १००१ ईस्वी तक) मे अपने समय मे जो काय स्थान




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