चित्र धर्म प्रकाश | Chritra Dharma Prakash

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Chritra Dharma Prakash by विवेकसागर जी महाराज - Vivekasagar Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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निश जागरूक रहते हैं। श्रापकी सतत प्रेरणा रो ही (१) मागोसजपुरा के चातुर्मास मे थी रत्नकरण्ड श्रावकाचार का प्रकाशन (२) एुलेरा के चातुर्मास में 'सहज सुस साधन' का प्रकाशन (३ ) कुचामन सिटी कै चातुर्मास में धम ध्यान प्रकाश का प्रकाशन (४) मारोठ के चांतुर्गग़ 5 में शुद्ध श्रावक धर्म प्रकाश! का प्रकाशन (५) सीकर में चातुर्मास में 'सरित धर्म-प्रकाश' का प्रकाशन तथा भगवान श्री १००५ महावीर के केबलज्ञानों- त्सवके उपलक्ष में कुचामन की जैन समाज द्वारा 'पाक्षिक व ग्रती श्रावक का प्रतिक्रमणादि पाठ का प्रकाशन हुआ है। इनमे हमारे पास 'धर्मेध्यान प्रकाश' व पाक्षिक ब्ती श्रावक का प्रतिक्रमणादि पाठ की पुस्तकों ही स्टॉक में हैं बाकी सब प्रतिये समाप्त हो चुकी हैं । धर्मानुरागी ब्रती एव त्यागी गण ही धर्मध्यान प्रकाश को मगावे । ब्रती व साधारण श्राबक के लिये पाक्षिक श्रावक ग्रन्य भेजा जा सकता है। जिन भाइयों को मंगाना हो वे वी. पी. सर्च भेजकर नीचे लिखे पते से निः शुल्क मगा सकते है । 'चारित्र धर्म प्रकाश' के प्रकाशन में कुछ विलम्ब तो हुआ फिर भी बडी सुदरता पूर्वक इस ग्रन्थ वा सस्करण हुआ है । उक्त दोनो प्रकार की प्रेरणा के लिये हम पूज्य महाराज श्री के तो कृतज्ञ हैं ही किन्तु हमारे कार्य में सहयोग देने वाली सोकर समाज के भी हम पत्यन्त प्राभारी हैं भौर इसमे भाग लेनेवाले श्री सेंड सागरमलजी छाबड़ा तथा श्री भंवरलालजी सेठी को भी धन्यवाद दिये बिना नही रह सवाता जिनके प्रत्यक्ष एवं परोक्ष कप्ट साधनाप्रों के कारण इस भव्य कृति वा भी सुदर साज सज्जा के साथ प्रकाशन हुपा । इस ग्रन्थ को धर्मानुरागी भाई सीकर से ही- मंगाने का वध्ट करे । विज्ञेपु किसधिकम्‌ | विनोत : ५ पं० विद्याकुमार सेठी न्‍्यायकाव्यतीर् दिनाए प्रधानाध्यापक इ-६-३६ थी दि जैन विद्यालय, कुचामन रोटी




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