मैं जो हूँ | Main Jo Hun

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
826 KB
कुल पष्ठ :
118
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)चलती हुई गाड़ी सेपेड़ों को भागते देखने केभ्रम-सी सचाई हैगाड़ी चलती है, पेड़ नहीं चलते हैं,
लेकिन हम भ्रम को सचाई मानबार-बार अपने को छलते हैं।जान बूझ अपने को छलना भी सुख ही है,
या शायद सुख की परिभाषा भी यही है।
वचपन में दादी खिलाती थी हींगहलवे में डालकर,दादी खिलाती थी हींग,हम खाते थे हलवा,हो जाता था पूश उद्देश्य यूँ दोनों का,
ऐसा ही कुछ कुछ होता है अब भी
माँगता हूँ सुख मैं ढलते उजाले काऔर वहीं चुपचाप रात्त उत्तर आती है,
फिर भी मैं सूरज के ढलने का आशिक हूँ,
इसीलिए चाहता हूँपंछियों की पॉत कोउड़ाता फिर देख लूं,किरणों के हाथ सेवीता पल छीन लूं,रात के अंधेरे से मुझको डराओ मत,
मुझको सुनाओ मतधरती के भीतर के कम्पन की आहहें,
भूचाल आयेगा, आने दो,सारी उथल-पुथल, सारा विध्वंस स्वीकार है,
हर नयी सभ्यताहिसी हड़प्पा के खण्डहरों के पार है।हर विध्व॑ंसमै जो हूँ / 25
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