ग्रहलाघवम् | Grahalaghavam

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
226
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)घिककारः १ | सान्वयभाषा्दीकासमेंत । ( १३)अहर्गणात्यन्नचन्द्रोद्ध ५1 १९1११ 1 ४३ में घटाया तद ४1२७1२१1 ४३ हुआ
इसमें क्षेपकाइ ५1 १७ ॥ ३३.] ० जोड़े तच १० | १४। धृष्ठा उ5पदह
चन्द्रीच्च हुआ ॥9९2, अब मध्यम राहुके लानेकी रीति लिखते हँ-
सजा राह दर वाहदधादात्फलठूदव॒कालकदय
स्यादगु ॥ ११४७जा *अन्वय+-नवक्ुमि: इपुवेट३ द्विया; घससंबात, आपात: फललव-
कलिकेक्यम्, चक्रग्रद्ध) अग॒ु३, स्यात् ॥ ११ ॥>अहगेणको दा स्थानम छख, एक स्थानम उन्नासका भाग देय जो'छात्धि हाय उसको अंश्ांदि माने । फ़िर -दूखरे स्थानमे छिखे हुए अहेग-णम् ४५ पताछासका भाग दय जा टामन्थद्ा -डसका कछाद मान- इन दोनाछाब्पियाकी जोड़ छेय तब जा अइडः दा उनको चक्र काहेये २२ बारद शांशे-में घटाये जे। ओेष रहे उसको अहर्गुशोत्पन्न राहु जाने । तदनन्तर ऊपरोक्त
शतिके अठुसार राहु साथ ॥ ११1
उदाहरण. ख्
अदहगगंणकों १८२१। १०२१ दो स्थानमें .छिखा एक स्थानम २९ का भागदि-
या ती ८० अं० ३ क० ९ विकला यह अंशादि.रूब्धि हुई । फिर दूसरे स्थानमें
टिखे हुए अदर्गेणम ४५ का भाग दिया तब ३३ कला .४८ विकन्दा यह
कछादि रूब्धिहुई | इनदोनों - छृश्धियों 51 ६१1 ४५ 1 ४४ की जोड़ा तब ८०
अर. ३६ वा. ५७ थि, हुआ इसको १३ या्िमं घटाया तब शेपरद्दे९ । ५ । २६३ 1३
यही अहर्गणोत्पनच्न राहु हुआ । इसमे प्वाक्तरीतिसे राहुके घुच#ं २ । ५० 1 ०
को चक्र ८ से झुणाकश तव ८1२२। ४०॥ ० हुए इसकी घढांया तव ० । १६
४३॥। ३ ओोपरदे इसमें राहुके स्षेपकाझ ०1 २७।॥ ३८। ० को जोड़ा तब २1१४॥। २१ ॥ | यह राहु हुआ अदगणात्वन्न राहुम राहुरा ध्रुदानक्षपद्ध एम-
छानेसेभी यद राहु आताह ॥डे अब मध्यम मइलडलानेकी रीति छिख़तेहं-
दिग्भ्ा ड्रधादनगणाकछ्ाभाद्वशलभक्तस्फलाश-
कृकलाबेवरे कुजः स्थात् ॥ 551
अन्वयः-दिरग्प्ः, दिनगणः; डिथा; अंकझाने: चिशेल3, भक्त)
( काप्येः » तद+ फर्ांशककलाबिवरम: कुजः ( स्याद् )॥ 5 ॥
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