माघमाहात्म्यम | Maghmahatmayam

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Maghmahatmayam by महाकवि माघ - Mahakavi Magh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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| :» व्यासजी ने कहा-यज्ञ करने के, बाद अवभ्ृत स्नान करके ऋषियों से मंगलाचार किये हुए, अपने सव नगरवाप्तियों ; से पूजा, किये जाने पर राजा. दिलीप अपने नगर के बाहर निकले ॥ ४॥ राजाओं में श्रेष्ठ सगया का. अत्यन्य रसिक, राजा दीलिप कोलाहल से बिरा हुआ, तथा आखेट ( शिकोर ) की सामग्री से युक्त था ॥ ५ ॥ उसके पैर जूते से ढके ५६ थे, वह राजा नीले रंग की पगड़ी पहिरे था तथा कबच ( बख्तर ) धारण किये हुए था, ऑॉगुलियों में गोधांशुलि पूजितो नागरेः संबंः स्वपुरान्निगंतो बहिः ॥ 9 ॥ दिलीपो भूभुजां श्रेष्े सुगयारसिको: भशम्‌ ॥, फोलाहलसमाविष्ट: आखेट व्यूहसंस्थितः ॥ ५ ॥ उपानदुगढ़पादस्तु नीलोष्णीषो हरिच्छदः ॥ बड़गोधाजुलित्राणो धनुःपांणिः शरी उप: ॥ ६॥ बडक्ुद्रासिवर्मा व तथा #&., भूतेश्र पत्तिमिः ॥ गहरेघरु च रम्पेषु वमेषु विपुलेषु च॥ ७॥ उल्लड्डितमहाख़ाता. युवा पश्मास्यविक्रमः ॥ मुदा क्रीडति तेः साथ कुण्जेषु सुगधान्सृगान्‌ ८॥ हन्यतां हन्यतामेषों _( बधनखा ) पहिरे था, और दवाथों में, धुंध और बाण लिये था,॥ ६ ॥ उसके स्रिपाही छोटी तलवार ४ । लिये हुए गहन तथा बिस्तीण मनोहर जंगल में घूमने-लगे ॥॥ ७ ॥ इनके साथ कुल्लों में शरगों को ह़ने वाले सिंह के समान | पराक्रमी, अनेक बड़े-बड़े स्रोतों को लॉयने वाले युवा पुरुष आनन्द पूर्वक क्रीड़ा करते थे | ८ ।। “वेग से यह म्ग च्ा ॥ /&५ | न ऑ21%६%६ 1 र्ज श्र ते 1 ह घर. ५ + अं 8४४६ ॥४:४४३६ जलता लल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ट 313 ८2232, 3 22 अब ॥२॥ ऑअअऔ अर




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