हिन्दी विपूवकोश भाग - 11 | Hindi Vipuvakosh Bhag - 11

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Hindi Vipuvakosh  by नगेन्द्र नाथ वाशु - Nagendra Nath Vashu

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about नगेन्द्रनाथ बसु - Nagendranath Basu

Add Infomation AboutNagendranath Basu

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
द्विनवाहन--द्वितीया' २६ इिलवाइन (सा पु ) दिल; गरुंडवाइन' यस्य। नारा- | दुग्साध्य1 ६ रोगविशेष, एक रोग॥( ब्रि० ) ७ दिजिश्लाः यण, विष्णु । । विशिष्ट, जिसे दो जोमे हो ।' दिजत्ण ( स'० यु० ) दिजस्य दन्तस्य ब्रणः। दन्तावु द, | दिजिन्द्र (स* पु० ) द्विज इन्द्र इव उपमित सम्तास 1 दातका एक्क रोग | दिज़्शप्त ( स० पु० ) दिजें: शप्त; ३-तत्‌। बर्बब ट, भटवॉस । ब्राह्मण इसे नहीं खाते। पिजय्रेष्ट (म* पु०) छिजैपु खेछः ७न्तत्‌। ब्राह्मगयष्ठ । इिजस्ेवक्त | स*० पु० ) दिजञानां बेवकः ६-तत्‌। ९१ शाद्र । ( व्रि० ) २ दिजसेविमात, द्विजोंको सेवा करनेवाला। दिलमप्तम ( स'० परु० ) दिजेपु सत्तमः | दिजये प्ठ । हदिजस्नो हु ( स'* पु० ) पलाशध्क्त, ठाकका पेड़ द्विज्ञा (म'० स्वो० ) दि्लायते जन-छ, टाप.। १ रेणुका नामक गस्धद्रव्य, सभाल,का बोज। इसका पर्योय-- श्णुका, राजपुत्री, नन्दिनों, कपिला, दिला, भरमगन्धा, पाए्ड पतो, कौन्तो चोर हरेणकाए्ः है । २ भार्गों, भागड़ी । ३ पालड, पालकका गाक ! यह एक बार काटे जाने पर फिर होता है, इसोसे इसका नाम द्विजा पड़ा है। स्त्रियां टाप.। ४ दिजपत्री, ब्राष्मण या दिजको स्त्री । दिज्ञाग्रज ( स*० पु० ) ब्राह्मण । दिज्ञाग्र ( स० पु० ) दिजषु अग्रः | थिप्र, ब्राह्मण । दिज्ञाडिका ( स'० स्तो० ) कटू,को, कुटकी । पिजाडइने (स'० मु०) द्विजम्य पच्िणी5क्षमिव भइ/ यय्या, डौपव, « कदु का, कुटकी । दिज्ञाति(स'० पु०) दे जातो यस्य | १ ब्राह्मण । २ ब्राह्मण, चत्रिय और वे श्य 1 १ भग्डज । ४ दन्‍्त, दाँत । ५ पच्ची । हदिजातिसमुख्य (स० पु० ) दिज्लातिषु सुख्यः। ब्राह्मण- आछ 1 दिज्ञानि ( स* यु० ) इिजाया यस्य, बहुत्रोही जायायाः जादेश:। द्विभाय क) वह पुदप जिसके दो स्वियां हों। दिक्षायनो ( स'० स्त्रो० ) दिजः अय्यते' ज्ञायतेनयेति भ्रय करण छ्युट. | स्थियाँ डोप, । यत्चोपयोत 1 हदिज्ञालय ( स० घु० ) द्िजानां पचिषां भालयः | १ तद- 'कोटर, पेड़की खोखनो जअगड जिसमें चिड़ियां अपना घॉमला बनाते है। २ ब्राह्मणों का घर। » हिजिज् ( म्र* पु०) दो जिश्चे यस्य1- ३ सो, साँप) २ सूचक, चुगलखोर । ३ खल, दुष्ट। ४ चौर, चोर 1 ५ एठ, हे. & गाजमापष, १ दिजय छ, ब्राह्मण । द्िजानां इन्द्रः द-तत्‌ । २ चन्द्रमा 1 ३ कपूर, कपूर। पतक्चीन्द्र, गयड़ । छिजेन्द्रक ( स'० पु० ) निम्ब_हच, नोबूका पेढ़। '* दिजेश ( स'० घु० ) द्विजानां दैशः ६-तत_। १ गयंड। २ चन्द्रमा । ३ कपूर । 8 दिजेग्वर, ब्राष्मण 1 दिज्नोत्तम ( सं पु० ) दिजेपु उत्तम: | ब्राह्मण ) द्विजोपाछक ( स' पु० ) छिजमुपास्ते उप-भरास-युल, | दिजसेवक, शाद्र । हिटसवा (स'० स्थ्रो० द्विपो सेवा। शत्र्‌ को सेवा । दिटसेवो (स'० व्ि०) दिट सेवा विद्यतेडस्थ इति। राज श्र सेवो। णो राजाजे भत्रसे पिला हो या मित्रता रखता हो। मतने ऐसे मतुयका द'ड बध लिणा है व द्विठ (स'० पु० ) हो ठऊागे लेखनाकारों यस्य। १ -ब्विमग 1 २ चह्निजाय्रा, खाह़ा । ( क्वो० ) १ दो ठकार ! दित ( म'० पु० ) १ देवभेद, एक देवताका नाम्र।२ ऋषिमेद, एक ऋषिओा नाम । इनके सोन भाईये, एकत, द्वित घोर व्ित । + द्ितय ( स'० क्लो* ) हे भ्रवयवों यस्य दि प्रवधषें तयप, 1 १ इय, दोकी संख्या । (व्रि०) २ छिल्स ख्याविधिष्ट, जो दोसे मिल कर बना हो | ३ दोहरा । 4०४ दितीय ( स'० त्रि० ) इयोः पूरण' द्वि-तोय ( द्ेस्तीयः । पा ४४२५४ ) १ इय, दूसरा। (मु) २ पुत्र, वेटा। भाग्मा हो पुत्र रुपटे जम्ग्रहण करती है, इसरोसे द्वताय मब्दक्ा अ्थ पुत्र इग्मा है । दितीयक ( स'० फ्लो० ) द्वितोयेन रूपेण ग्रहण कन्‌ | १ च॑ बादिवे द्वितोयदप दाग ग्रह |. प्वितोयेडक्ि सवः कन्‌ 1 २ दिताय दिनम्रव रोग, वद्द रोग जो प्रत्येक ढूमरे दिन होता हो। ( ब्रि० ) ३ इ५, दूसरा । द्वितोयव्विफला ' (स*० स्को० ' छितोया धिफला। गाश्मारों, एक बड़ा पेड़ | द्ितीया (स'० खो) दितोय-टाप_॥ १ गैडिनो, स्तो 1२ तिथिविश्षेष, प्रत्येक पश्चकी दूसरों तिधि, दूज़॥ भखिनों- कुमारका जन्म दितोया तिधिमें इतना था, इम्रेसे यह ऑल




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now