पातन्जल | Patanjal

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
27 MB
कुल पष्ठ :
356
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)82649 6«हैच््च्च्न््््ििि तक ववचचखिससकिनसस 4 न कप
[ 3१५४ | ।लब्षप्रत्ल्ानबानागजत्ना!) प्रसाणनिसु पदाव -(तत्) “तानु पंचचु द्ातित उन पांच द्वक्तियों में प्रम्ाश बतिलि: टला 5 ००११सीन प्रकारज्ी है (प्रत्य जम, “अब मज्ंप्रतीति प्रत्य व् ' दच्द्रियीं के दादा .| 5 ०8
$जो जआझानहोताहे (बनुतान) अनुप्चा न्यी नैत्यनुप्रानम् ' प्रत्यत्र8 ४के.अनन्तर जिझके दारा ज्ञान होता है उसे अनुमान कहते हैं (आमगमस:)आश्वमन्ता इम्बते चुध्यतेर नेनिव्यागमः शच्द:” सलीगप्रकार क्षमका जायजन म5० आ०+जमेटभललफ नतनन मल'॥ जिसके दारो उसे आगम कहते हैं 1७1सू० भावाध--पूर्ब-क् पांच धतसियीं मेरे प्रभाद धदृश्ि ३ प्रकारकी
है? प्रत्ज्न--२ अलुर्म/न--३ आयमस --- ॥७॥ हहुव्या० छ> क्षा» -इृबच्द्रियप्रयालिकया चित्तस्त बाह्य
वस्तु परागात् तहिषवा सामसाब्य विभैषा त्सनोथस्र विशेषा
वधारणं प्रधाना हत्तिः प्रत्यक्ष प्रसाणंकल -मविशिष्ट: पीरुणेय+ ,७3५०००५००-+२०4०-०५३० सबब +>क+क-िक५० ०१३ क+ ५3 3>कै+ ५3०५
/ ०2 पा आम मर + 2200 कारन भ कम भक भरा न क_ जमकर
हरी |
| श्विततत्त बोध; बुद्े: प्रति संवेदिपुसतः इत्य परिष्ठा दुपपाढवष्यासः अजुते वस्वतुल्य जातौत्रे प्वलुबुत्ती भिन्न दातो वेब्योव्यावृत्त: सस्वन्धोय कंविषया साम्रोन््या वधारंण प्रधान बलि
सलुमानस यथा दिशान्तर प्राप्त मत भच्च न्छुतारकं चत्रवत्
चिध्यज्ञा प्राप्तिर बति:, भाग न इंटों चुसितों वा थः- प्रचसव -बोध काव्तवे शब्द नो परदिश्यते शब्दा 'सदथ विवयां- बश्ति:>अतुरागम:ः यस्य अवेयावयों वंकतेनंटेंटा लुँमितेांथ: से आ-
अन्त: एवले संलवऋत रितुद्चठा लुर्त्षतायो:निविप्दस्यथात् ॥902: & :590
डे(क्या &3५+२७०-५.3२३५०ाउअक कर »५% “०० १३९०३ ४८»५/4:-30«५५७३६३५-२५५०५५०/६०७७-५ 3225-35;शक कल शिकार पद 3 कक कक सकनलआ लक ३ ०७० तट थक ताअप&७पलसममल्ललन अत नननस सम नस मनन भ+» कप ++ 333 ३ मम मल मम_न कक मम न न_पक लक मनन मनन _ननममन+_>झ०2 के औओं ०.4 २५०९ नाक अत पिजनलनननाय वर अलजजज+ मिल सनन+>न बस 4७ कमब 22 3न लक कब ०कर ही आप2
User Reviews
No Reviews | Add Yours...