चम्पूभारतम | Champubharatam

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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डेसम्तालोचना । श्&आबूषमिव बकच्रछाक्रान्तां, पाताठनगरीमिव शपत्यहं वर्घभानवलिशोकाम, लअड्राज्यसी माम्‌ इव सूर्यतनयालनुकूछप्रतिष्ठाम , रविरधाइघुरमिवैकचकासः ।ग़छके निर्माणमें ख्वातकीसि बाममइने विरोवामासके दारा गश्यका बढ़ा गौरव बढ़ाया है, उस विरोधामासका एक इष्टान्त इस चन्पूमारतर्मे मी देखिये--विश्ल्ुल्दर्घितगिरित्रजनमपि खाछुलाखेद्तिमहीस्॒त्छुछम , जराघटिवदेह- मपि देदीप्यमानवलप्तस्पदम्र , जाश्माजेतारमपि पदार्थापहारलाधरितारस , सागध-सपि विगीठब्यापारणगिरिन्नज, जरा, मागघ आदि पदोका इलेघ इस विरोधामासको चमका रहा है ।इसी तरह अन्य अल्झारंका मी यथोचित समावेश किया गया हैँ । यद्यपि इस चम्पू- काब्यमें गयकी मात्रा कुछ कम है, केवरकू कथामागकौ जोड़नेदी कढ़ीका काम गद्य खण्डोंसे लिया गया है, फिर भी कथानकके विपुल्ताकृत वैचित््यके चलते पाठककों दृदयों- दवेग नहीं हो पाता 1ऊपर दिये गये उद्धरणोसे स्थालोपुछाकन्यायद्वारा आपको इस चम्पू अन्यके साद्ित्य- चमत्कारकी झांकी मिल गई दोगौ विज्वेष इस अन्धमें ही देखें ।पात्रात्ोचनइस गझनन्‍्यमें पात्नोकों नया रूप नहीं दिया गया हैं। मदहामारतके पात्र अपने-अपने रूपमें हा उपस्थित किये गये हैं । मद्दामारतके पात्र इतने प्रसिद्ध ६ कि उनकी मालेचना मनावदवक है । इस सन्वन्धर्में इतना और जान लेना चाहिये कि जब कवि रसप्रकर्षसष्टिके लिये कथामें मेद उत्पन्न करते हैँ उस समय कविकल्पित पात्रचरिश्रका आलोचन कवि- छन्पादित चमत्फारातिशवकी इृष्टिते आवश्यक दो जाता है चन्यूमारतके पात्रोके -चरित्तमें कोई मौलिक परिवत्तंन नहीं किया गया है। मद्यामारतमें उनके चरितमें जो न्‍्यूनाधिक्य है उसे ज्योंका त्यों. रख दिया गया है। इसलिये यहाँ पात्रोंको आलोचना नहीं दी जा रही दे ।चन्पूभारत की दीकाअम्पूमारतकी दो टीकायें मुझे पदनेछो मिल सकी--१. कुरविकुलचन्द्र रामकवीनद्र- कहुत दीका ठया--२- नारायण ओऔडझण्डेझत थौका। इसमें दूसरी दोका अत्तिसंक्षिप्त दे । पहली टीकामें लो छुटियाँ मुझे दोख पड़ीं, वे नीचे दी जा रही हैं--१--पाठ झुघारनेका यत्न न करके जो पाठ जैदा देखा उसौकी टीका करनेके लिये बात अयत्न किया गया है।




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