युद्धकांण्ड | Yuddhkand

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
49 MB
कुल पष्ठ :
840
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)भुवन वाणी टुस्ट द्वारा प्रयुवत(त्तमिकत) वर्णमाला का नागरी-रूपान्तरतमिल्ल के विशिष्ट
व्यम्जन कक! के स्थान
पर, केचद्रीय. हिन्दी
निदेशालय ने,३३-६-६५
में प्रकाशित अपने
'परिवर्द्धित नागरी' पत्नक
में, क्र रूप निर्धारित
किया था ।विदित हो कि
५-६ फ़रवरी, १६८०की
निदेशालय की.बैठक में,
जिसमें में भी सम्मिलित
था, 'क्व के स्थान पर
'&' ही को ग्रहण किया
गया ।ए# तमिल वर्णाक्षरों
के स्थान-भेद से
विभिन्न उच्चारणों
को समझने के लिए
विद्वान अबुवादक की
कस्ब रामायण
बालकाण्ड' क्र
भूमिका पूँष्ठ २३-
“र४ दुष्टव्य ॥ क,तमिल -देवनागरी वर्णमालाखअञ. #आ ीड -#हई.
क्क क्का कि की[७ल व (?कक्र धान
[87.7 छान,ल 6क्षष «ण्स।
| ##6ह. &ज 089 क्षच, 5, त, प -ये अक्षर समान लिखे जाकर भी स्थान-भेद से क-ग-ह,
च-ज-श, ट-ड, जा, प-ब बोले जाते हैं। तमिक्ल में ए और ओ के हृस्व
ओर दी स्वरों (मात्राओं) को भिन्न रूप में लिखा जाता है। नागरीलिपि में उनका रूप3५; >>) हैं। देखिए पृष्ठ ३०-१२ पर।
-ननन््दकुसार अबस्थी
मुख्यन्यासी सभापति, भुवन वाणी द्वस्ट
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