युद्धकांण्ड | Yuddhkand

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : युद्धकांण्ड - Yuddhkand

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about कंबन - Kamban

Add Infomation AboutKamban

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
भुवन वाणी टुस्ट द्वारा प्रयुवत (त्तमिकत) वर्णमाला का नागरी-रूपान्तर तमिल्ल के विशिष्ट व्यम्जन कक! के स्थान पर, केचद्रीय. हिन्दी निदेशालय ने,३३-६-६५ में प्रकाशित अपने 'परिवर्द्धित नागरी' पत्नक में, क्र रूप निर्धारित किया था । विदित हो कि ५-६ फ़रवरी, १६८०की निदेशालय की.बैठक में, जिसमें में भी सम्मिलित था, 'क्व के स्थान पर '&' ही को ग्रहण किया गया । ए# तमिल वर्णाक्षरों के स्थान-भेद से विभिन्न उच्चारणों को समझने के लिए विद्वान अबुवादक की कस्ब रामायण बालकाण्ड' क्र भूमिका पूँष्ठ २३- “र४ दुष्टव्य ॥ क, तमिल -देवनागरी वर्णमाला खअञ. #आ ीड -#हई. क्क क्का कि की [७ल व (?कक्र धान [87.7 छान,ल 6क्षष «ण्स। | ##6ह. &ज 089 क्ष च, 5, त, प -ये अक्षर समान लिखे जाकर भी स्थान-भेद से क-ग-ह, च-ज-श, ट-ड, जा, प-ब बोले जाते हैं। तमिक्ल में ए और ओ के हृस्व ओर दी स्वरों (मात्राओं) को भिन्न रूप में लिखा जाता है। नागरी लिपि में उनका रूप 3५; >>) हैं। देखिए पृष्ठ ३०-१२ पर। -ननन्‍्दकुसार अबस्थी मुख्यन्यासी सभापति, भुवन वाणी द्वस्ट




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now