भक्ति - सूत्रम | Bhakti Sutram

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Bhakti Sutram by नारद - Narad

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ढक ७ 2.4 ५/२₹<५.+ #08 + 0 80: 2 अक ० _& नारबभक्ति-सत्र 5 श्प्जै 2 कहता है इसकारण परम पुरुषाथ मोक्ष द। एसमज्र साधन ॥| प भक्ति की व्याख्या करिये ? तव मह॑पि नारदजी छुछ ; के द्वारा भक्ति की व्याख्या करने लगे उन नारद छत ; शक्तिसत्रों में पहिला सूत्र यह है- 2 अथातो भक्ति व्याख्यास्याभः ॥१॥ धशदो मंगलवाचक+ तथा चोक्त-ओंकास्थ्राथ शब्दश्न ढावेतो ब्रह्मणः पुरा | करठं भिल्रा विनियातोौ तस्मान्माडु वुभी । आनन्तर्यवाचकी वा अथशब्दः, झेपायनप्रश्ना नन्तरमित्य4ः । अतः भक्तेरव परमपुरुषाथापायभूतत्वात ! भक्ति व्यास्यास्यामः मक्ति तल्ववर्णनेन विद्वशुमः । ; पदा्थ ( ग्थ ) क्ृष्णद्धेपायनके प्रश्न करने के अनन्तर (अतः ) एक मात्र भक्तिके ही परम पुरुषाथ मोक्षका साधन होने से ( भक्तिय ) भक्ति को ९ व्याख्यास्यामः ) तत्त बेन के द्वाग विस्तार से वर्णन केरेंगे। ( भावार्थ ) कृप्यट्ेपायन वेदस्यासजी के प्रश्न करने पर देव॑पि नारद जीन कहा, कि-हे महेप ! में आप के प्रश्नके अनुसार परस पुरुगावसाथक पम्मग्रेमहपा भक्ति की व्याख्या करूँगा, 1 | 1 2 6 22.0 “२१७ 2 ता 2. हे की 8 आय के जी पी 1 महा ० कै; शा ञ्ज्ने थाप का अवतार लोकापकार के ही निमित्त हे, आपने मुझ , से जो यह भक्तिविषयक प्रश्न किया है, यह भी लोकोप- + कार कर्म के लिए हो है। आपने अपने शिष्य जामाने $ मान के ठाग प्ृवमीमांसा में कमजित्रासा ओर स्ये है ५ अब & 28 & 2 ज, 0 >& 3 १5 2 /5 ४ /४ 7 ४ ४ +-/४ 4 अरी 2 आज. 2.2 आस ज्च 4क ५ कमा ऋण | बम ओ अयाक” उत अकमक २7“पकककयय अदा एच पर जिम ऋ यार आधा फ आशा ४ पकयाका १ फराकका अर जा | |




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