वेद्मंदिर प्रवेशिका | Vedmandir Praveshika

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Vedmandir Praveshika by आचार्य प्रवर - aacharya pravar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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३ सूमिका गम्मीर वैद्विक प्र्योका निर्माण भी: किया था »। दुर्भाग्यसे मारतमें एक भी त्ेद-मन्दिर न-बचा । यह अमाव इमारे अद्वेबचरण मुझ-क्ा बेद द्नाचार्य ” मद्रामण्डछेशखर * स्वामी गइगेश्नरानन्दजी महाराजफों बहुत सखर रहा या। अवप्तर हाथ जाते द्वी, इन्होंने' अहमदाबाद एक विशज्ञाल वेद-मन्दिर स्थापित कर दिया | यदिक विद्वार्नोफ़ों इमसे महता प्रश्नन्नता हुईं। पण्डित +श्रीपाद (दामोदर चातयलेसर! ने तो यद्दों तक कह्ठा कि श्री स्वामीजीने भारतकी एक बड़ी कमी ही दूर नहीं की, बल्कि विश्व्में मारतीयोंक्रा सिर उन्नत कर दिखाया | 1. महाराजश्रीने वैदिक ग्रचारमे अपना तो पूर्ण जीवन अर्पित जया द्वी है; हम छोगों पर भी वह्दी अनित्रार्य अत-पाठन रखा दे । ) + आपके रसदुपदेशका द्वी फठ दें कि आज अहमदाबादके ससंगियोमें वैदिझ सादिलफा चिर छृप्त ग्रेम जाग उठा &॥ पिश्ेपत्‌ प्रवर प्रतिमाशाडी बक्रीठ भाई एल्शइर सुन्दर देमाई (अहमदात्ाद) महाराजश्राके चरणोंमे अटठ भक्ति तथा श्रौत साहित्यम्रें अगाघ श्रद्धा रखते थे | प्राय नित्य ही चदिक प्रकाशनसा भड्डल्प प्रसट किया बरते थे। अपने सद्धल्प उल्प- पादपकी अविरठ सफ़छताक लिए माईने ता० ३-४-१९४५ ० में अपने एक मान [म्यु० छे० न० १९७७, १९७७/१, १९७७/१/१, १९७७/२, १९७७/३ मारगपुर अद्मदावाद ] पर दुस्टे-कमेटी बनाते हुए डिखा कि-- बैद और दहन > निषण्ड निर्माण देखो इसी पुल्तकझ्ा पृ० १३ 1




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