द्विबिन्दु वर्गीकरण का संक्षिप्त परिचय | Dwibindu Vargikaran Ka Sankshipt Parichy

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सामान्य एकल पयदि कोई पत्रिका कसी शिक्षित सस्था द्वारा प्रकाशित होती है ती प्रथम प्रकाशन तिथि के स्थान पर सस्था का स्थापना वर्ष दिया जाता है जैस्षे--नागरी प्रचारिशी समा पत्रिका 0152णी४/93 (1893 नागरी प्रचारिणी समा का स्थापना वर्ष )सामास्य एकल #/ व ३7 का प्रयोग समास रूप से होता है गत इनके पारस्परिक अन्तर को समभ लेना झ्रावश्यक हैं। साधारणत ७ जीवनी के लिए तया %7 जीवन अध्ययन के लिए प्रयोग होता है। जीवनी के सूत्र के प्रमुसार आत्मकथा के लिए, 1, वचनामृत के लिए 2 तथा पत्रावली के लिए 4 झ्को का प्रयोग काल अक के पश्चात्‌ झल्पविराम चिन्ह के साथ किया जाता है जैसे --शि० रा० रगनाथन की जीवनी 29062 मेरी कहानी-जवाहरलाल नेहरू २44 ४४89,1 परम हस के वचनाम्ृृत &2छी73,2किसी व्यक्ति की जीवनी किमी विषय विशेष से सबधित न ही भ्रथवा एक ही पुस्तक मे भ्रनेक व्यक्तियो की जीवनिया हो ठी इस प्रकार के ग्र थ सामान्य वर्ग मे ही रखे जाते हैं ।किसी राजर्नतिक, ऐतिहासिक व्यतित जैसे राजा, अ्रध्यक्ष, मत्री ससद सदस्प व किसी राजनैतिक दल के नेता के जीवन संबंधी विषय सामग्री को उस विषय से सबधित वर्गा क के साथ रखनी चाहिऐ तथा वहा » के स्थान पर ५7 का प्रयोग होता है जैसे --प्रधान मत्नी मुरारजी देसाई- एक अध्ययन ४44,24५71/96नेपोलियन का चरित्र ५५३,1४71.69राममनोहर लाल लोहिया---जीवन कथा ए44,45 (९) ४71२०देशवक्ष के पश्चात प्रयुक्त सामान्य एकल--द्विबिन्दु प्रणात्री में कुछ पूववेदर्ता सामान्य एकलो का प्रयोग देश पक्ष के पश्चात्‌ होता है। इन्हे छोटे रोमन श्रक्षर ४ व $ से व्यक्त किया जाता है) इनका भी कोई सयोजक चिन्ह नही होता है ।$ का प्रयोग प्रशात्तनिक रिपोर्ट के लिए तथा $ का श्रयोग सामयिक सॉस्यिकी के लिए होता है जैसे --भारतीय रेल मत्रालय की आधिक रिपोट, 1965 #415 447'२65 19352 के भारतीय रेल यात्रियो की साल्यकी >415 445 ४52




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