मनुस्मृति भाषानुवाद का विषय सूची पत्र | Manusmrati Bhashanuvad ka vishay suchi Patr

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
31 MB
कुल पष्ठ :
494
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)हे सनुभाषानुवादविपय | *
“सनु झीर सरोचि आदि ९० प्रणापतियों और शन््य ७ सनुझीं तथा
बच राघसादि को उत्पत्ति प्रति श्ोकों वें” प्रक्त.. ३-७सब के घसे वर्णनाथे सन् की प्रतिज्ञ.._, ४२
६ श्लोक जो ३ पुराने युस्तरकों में मिला है . ४ ०
जरायुज, श्रर्ठण, स्वेद्ज, उद्लिज्जों की उत्पत्ति ४३-४४
भनु ने क्षपमी उत्पत्ति के साथ जरंदुत्पत्ति का उपसंदवर किया है ५९
उत्पत्ति और म्लूय की अवस्याजों का वर्ण ५२-५५
का कथन कक परमेश्वर ने मुझे यह शास्र पढ़ाया, मैंनेभरोष्यादि को, इन में शूगु तुम्हें सुन्ावेगा० अत्तिप्त शर5-प७
'यूतरु ने ७ सजुओों का वर्णय और भास बताये» प्रत्ञि् ६०-६३
चिमेष, काष्ठा, कला, मुछ्त्ते, मानुष, देव, पिल््य, दिन, राज़ि आदिफाल के परिनाण ६४-७३
9 काश, वायु आदि तत्व और एन के गुणों का बए॑।.. न 3३-5८
सन््दन्तर का परिसाण 36-६९
युग का प्रभावश म्क्षिति.| |। ८९-८६
ब्राह्मणादि बर्षों के फसे बा ८३-४१
ब्राह्मण की प्रशंसा रा ९२-९१
प्राणियों मे कौन किस से श्रेष्ठ है ९६-९७
पुत्रः सब में ब्राह्मण की पेष्ठता ह (८-१०१
पृ का कथन कि यह शार्त मनु ने धनाया और एस के पढ़ने
का अधिकार और फल» प्रक्षिपत ६ ः१०२-१०७पार को प्रशंख_#»ढ ११४-११०
_अनुस्मृति का संक्षिप्त सूचीपत्र” प्रत्तिप्त १९
| दवितीयाध्याय मैं-
घ्मोपदेश को प्रतिज्ञा | १
सकामता, 'निष्कामता का पिवेक - पा २-४
बेद्, र्तृति, शील, अश्मतुष्टि का घमे में प्रमाण ह
: ' शृगुवचन से देद प्रशंसा» अिप्तश्रुति स्तृति में कहेघसे.को प्रशंसा, मे सामने की सिन्दाहाशत,
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