जैनन्याय खण्ड खाद्यम | Jaina Nyaya Khanda Khadyam

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
शेयर जरूर करें
Jaina Nyaya Khanda Khadyam by बदरीनाथ शुक्ल - Badrinath Shukl

एक विचार :

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

बदरीनाथ शुक्ल - Badrinath Shukl के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
( १४ )बीज सामान्‍य में अद्धुरार्थी कृषक की प्रवृत्ति के उपपादनार्थ बीजसामान्य को अद्भुर का कारण मानना आवश्यक है। वोद्ध का वक्तव्य -- संसार में दो प्रकार के बीज पाये जाते हैं, एक सहकारियों से युक्त और दूसरे उनसे वियुक्त | कुसूछ आदि रक्षास्थानों में रखे हुए बीज सहकारियों से वियुक्त रहते हैं और क्षेत्र में बोये हुये बीज उनसे युक्त होते हैं । अद्भुर के जनन का सामथ्यं सहकारियुक्त वीजों में ही मानना उचित है न॒ कि सहकारि- वियुक्त वीजों में, क्योंकि उन्हें यदि अद्भुर के प्रति समर्थ माना जायगा और अद्भूर का उत्पादक न माना जायगा तो ' समर्थ कारण अपना कार्य करने में वलूम्ब नहीं करता” इस नियम का विरोध होगा, और यदि उन्हें अद्भुर का उत्पादक मान लिया जायगा तो सहकारियों के विना ही कार्यका जन्म हो जानेसे उनकी कारणता का भज् होगा ।सहकारियों के सन्निधान के लिये भी यह नियम मानना आवश्यक है कि वह अद्धूर के प्रति असमर्थ वस्तुवों में नही होता, यदि उसे असमर्थ वस्तु में भी माना जायगा और अद्भधुर की उत्पत्ति न मानी जायगी तो सहकारियों की कारणता का भज्ध होगा क्‍योंकि सामथ्यंज्ञाली सहकारियों के होते हुए भी अद्धूर की उत्पत्ति नहीं होती, और यदि अद्धुर की उत्पत्ति मात ली जायगी तो बीज की कारणता की - हानि होगी क्योंकि उसके विना-भी अद्धूर की उत्पत्ति हो जाती है । है. ७५ 2 । ह हेइसी प्रकार यह भी नियम मानना होगा कि अद्धूर के प्रति, समर्थ बीज कभी भी सहकारियों से असन्निहित नहीं होता, क्योंकि यदि समर्थ बीज को भी सहकारियों से असन्निहित. माना. जायगा ओर. अद्भुर की उत्पत्ति न मानी जायगी तो समर्थ कारण अपने कार्य को. पैदा करने में . विल्म्ब नहीं करता इस नियम का विघात होगा - और यदि अंकुर की उत्पत्ति मान छी जायगी तो सहकारियों की कारणता का भेज्ध होगा क्‍योंकि उनके बिना भी अंकुर की उत्पत्ति हो आती है ।. ःअद्धुरसमर्थ वीज सहकारियों से युक्त ही होते हैं, यह जो बात. माननी पड़ती हैं उसकी उपपत्ति वीजत्वरूप से सभी वीजोंको अद्धूर का कारण मानने पर नहीं हो सकती क्योंकि ऐसा मानने पर कारण की ही समर्थ संज्ञा होने के नाते कुसूलस्थित वीज समर्थ की श्रेणी में आ जायगा जो कुसूल में रहते समय सहकारियों से असन्निहित होने के कारण अद्ुुर को नहीं पेदा करता, अतःअद्भुर को पेदा करने वाले सहकारियों से यक्त जों में कुर्व॑ हा छ सहकारियों से युक्त वीजों में कुवेद्पत्व नाम की




User Reviews

अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :