भीगी हुई रेत | Bhigi Hui Ret

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
190
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)था । एसा पता होता ता बाहर दो इंटो का झापडा छा लेते ।
“खर, चिट्ठी डलवाये दे रही हु गोमू से कि जठवाड़े बीच हम आ रहे हैं।
दवाई लेके सो जाओ दो घडी 1”
सचमुच कइ दिन बाद बावूजी को वडी गहरी नीद आइ। सिर ऊपर जो
शहूती र झुका चला आ रहा था, लगा कि नही, अभी सिर पर छत वी छाया बवी
हुई है. पाव तले की जमीन अभी ज्यादा बिखरी नहीं ह कोइ नया अवूज्ञा-सा
सपना उनवी पूतलिया को धपकन लगा था | पं
डूदते क्षणा का बोध / 27
User Reviews
No Reviews | Add Yours...