ज्ञाता धर्मकथाङ सूत्र | 1917 Shri Gyata Dharmakathang Sutram Part-1

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1917 Shri Gyata Dharmakathang Sutram Part-1 by कन्हैयालालजी मुनि कमल - Kanhayalalji Muni Kamal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अनगारधर्मास्रतवर्षिणी टीका. सू, २ सुध्मस्थामिनःचस्पानगर्या समवसरणम्‌ ७ नेति स तथोक्त आगमः, स्वसमय-परसमय-ज्ञान वा, तत्मधानः | नयप्रधान नयाभ्ननयन्तिन्बोध परापयन्ति अनेक पर्मात्मकत्रस्तुन एकांशमिति ते तथोक्ता: अनेकशमौत्म ऋवस्‍्त्वेकांशपरिच्छेत्तार,, ते नेगभादयःसप्त, तत्यमधान।। नियम- प्रधान:-नियमा।न्द्वव्यक्षेत्रकालमावेन विविधापिग्रहग्रहण, तत्मथानः। सत्य प्रधान;-सत्येरजोवानीवादिपदार्थानां यथावध्वितस्वरूपण्कथन, तत्पधान। । भौ्॑- प्रधानः-शुवेभात्रः शौचमू-अन्तकरणशुद्धिरुपे, तत्मधान! । ज्ञॉनप्रधान।-ज्ञान॑न जिनोक्ततस्‍्तवेषु यथाथेबोधरूपं, तत्यधान। दशनप्रधान:-दर्शनं-जिनोक्त तत्वा का अग है ब्रह्मचये अथवा आत्मज्ञान। इनमें ये दोनों वाने थी इसलिये ये ब्रह्म प्रधान सी थे। इन्हें स्ब्समथ ओर पर समय का पूणज्ञान था- इस अपेधा ये वेद 'प्रधान भी थे। नेगम संग्रह आदि सात नय'शास्त्र- कारोंने कहे हुए हैं। नयका तात्पय उस ज्ञान से है जो अनंतबैर्यात्मक बरतु के एक धसमं को ग्रहण करता है। ये इस नयात्मक ज्ञान से विराजित थे-इसलिये नय प्रधान भी थे। द्वव्यक्षेत्र काह और भावकी अपेक्षा थे अनेक प्रकार के निध्र्मों का ग्रहण करते थे। और उनका निर्वाह भी करते थे इसलिये ये नियम प्रधान भी थे। जीव अजीव आदि पदार्थों के स्वरूप का ये यथाथे प्रतिपादन करने बाछे थे इसलिये ये सत्यप्रधान भी थे अन्त;- करण की शुद्धि का नाम शोच है-यह शुद्धि इनमें थी-इसलिये ये शौच प्रधान 'सी यथे। जिनेन्द्र छारा प्रतिपादिततत्त्वों का संशय आदि से रहित जो यथार्थ बोध होता है उसका नाम्त ज्ञान है।यह ज्ञान इनमें था इसलिये पछु सानवाां ज्थाव्या छे, प्क्षशण्ड धु तात्पर्य प्रह्मथथी जथवा मात्मज्ञान छे, शेसनासां जे जन्‍ने विशेषता छपी, मिटा भारे ने अक्षभ्रधान पछु छुता, शेभने स्वश्नभ (वशाय) खने परस्षमथ (अन्यशाख)च सापुएपणु शान छत, मे सपेक्षाओं नये अधान 'पछु छता, नेणम सअछ पणेरे सात नय शाख्रि अछेक्षा छे. नथने। व्यर्थ ' से शानथी छे, ० शनत पयोत्म॥ पद्चुना ले४ घर्माने अछछु 3रे छे, को जा नया- त्मड शानथी शेाल्रित छता, सेटक्षा भादे नवअ्रधान पणु छता, दन्य, श्लिन, आण प्यने लवनी मपेक्ष थे जनेशवेध नियमे(७' अछणु 5२ता रूप, जने तेभने। निर्षाड पणु 5२ता छता. स्ेटक्षा भारे ले नियमभ्रधान पणु छता. ९४१ खक्षव बणेरे पहाग्रेता स्वर्पत्ञा न्थे यथाय अतिपाइन अश्नार छत, मिटला भारे थे सत्य अधान पणु छुपा, न्मन्पःथरएुनी शुद्धिच नाम शोथ छे, गा शुध्चि भेयनाभां छती, मेटशा भाटे ने शौयअवान फण छपा, किनेन्द्र बडे अतियाहित ततवाने। साशय पणेरेथी रहित ५ यथा माघ आए 9, पेसबु' नाभ शान छे. जा शान सलिमनायां छत, समेटे तेम्मोी जानअधान यु




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