ऋग्वेदभाष्यम् | Rigwedabhashyam

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
29 MB
कुल पष्ठ :
638
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)ऋग्वेद: मे० २ | अ० १ ।सू० १1 ... १४१पुनस्तमेव विषयम हक कक
ः ० हे फिर उसा वि०॥नये स्तोलभ्यो गोअग्रामश्वपेशसमस रातिमु-_ पसृजन्ति सूरय॑:। अस्माज्व तोश्व अर हि नेषि
. वस्य आ बुहददेम विदथें घुवीराः॥ १६ ॥१९॥0202:__ थे। स्तो5तृभ्य: | गोअंग्रम् | अश्व॑पेशसम् | अग्नें ।
रातिस। उप$सृजन्ति । सूरयः ।अस्मान् | च। तान्।चय। प्र। हि। नेषिं।| वस्यः | आ | बहत । वर्देस | विद-
' थें। स॒5वीराः॥ १६ ॥ १९॥पदाथः-( थे ) घार्मिका विद्याथिनः ( स्तोठब्यः) सकलवि-
द्याध्यापकेण्यो विदृज्यः (गोअग्राम) गावइन्द्रियाण्यग्रसरांषि यस्यां
ताम् ( अश्वपेशसम् ) शीघ्रगन्त पशों रूपमिव रूप॑ यस््यां ताम्
( अपने ) विहन् ( रातिम ) विद्यादानक्रियाम् ( उपस्ाजान्ति )
| दंदते (सूरयः) विद्याजिज्ञासवों मनुष्याः (अस्मान) (च) (तान)
| (च) (प्र) (हि ) खलु (नेषि) नयसि ( वस्यः ) अत्युत्तम॑ वास
6 स्थानम् ( आं ) ( बुहृत् ) महंत ( वदेस ) ( विदथे ) विद्यासं-
| ग्राम ( सुवीराः ) उत्तमेंः शोयोदिगुऐरुपता; ॥ १६ ॥| जन्वय-हे अमन त्वं, ये सूरबः स्तोतमभ्पों गाअग्नामखपंशस
| रातिमुपरुजन्ति तौश्वास्माँश्व वस्य आप्रणेषि हि सुवीरा वयं विदथे
| बुहदददेम॥ १६ ॥ रा
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धर्मरक्षक-Dharmrakshak
at 2021-07-02 21:40:29