कहानी की कहानी | Kahani Ki Kahani

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Kahani Ki Kahani by राहुल संकृत्यायन - Rahul Sankrityayan

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about राहुल सांकृत्यायन - Rahul Sankrityayan

Add Infomation AboutRahul Sankrityayan

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
खिलाया-पिलाया । वे बड़े गोभक्त थे। उनके पास कृष्णा गौ थी। या तो वह काले रंग की रही होगी या उसका नाम उन्होंने कृष्णा रख लिया होगा । वह सुबह उठते ही सबसे पहले कृष्णा की सानी-पानी करते और उसी समय उसका दूध भी दुह लेते । इसके बाद तुलसी-घाट पर स्तान करने चले जाते । वहां से लोटकर पूजा-पाठ करते । पूजा-पाठ की समाप्ति पर कृष्णा पर फूल चढ़ा और उसके अगले खूर पर अपना मस्तक रख उसकी पूजा करते । कभी कृष्णा खाने-पीने में या दूध देने में इधर-उधर करती, तो उसके दो डडे भी जम्ता देते थे ! मतलब यह कि ब्रह्मचारीजी कृष्णा की 'पृजा' केवल फूलों से ही नही किया करते थे, डण्डों से भी करते थे !! कुछ दिन काशी रहकर दोनों मित्रों ने फिर अपने गांव लौट आना ते किया। केदारनाथ के मन में तो (विद्वान साधु बनने! की धुन सवार थी। अब घर के लोग इनके संकृस्त पढ़ने के इतने' विरोधी नही थे | आठ वर्ष पहले घर से कुछ तीन मील की दूरी पर वछवल के जिन फूफा जी के यहां सारस्वत-व्याकरण' पढ़ना शुरू किया था उन्हीं के यहां अब फिर लघुकोमुदी-व्याकरण' शुरू किया । २६




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now