गल्प समुच्चय | Galp Samucchya

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Galp Samucchya by प्रेमचंद - Premchand

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प्रेमचंद का जन्म ३१ जुलाई १८८० को वाराणसी जिले (उत्तर प्रदेश) के लमही गाँव में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम आनन्दी देवी तथा पिता का नाम मुंशी अजायबराय था जो लमही में डाकमुंशी थे। प्रेमचंद की आरंभिक शिक्षा फ़ारसी में हुई। सात वर्ष की अवस्था में उनकी माता तथा चौदह वर्ष की अवस्था में उनके पिता का देहान्त हो गया जिसके कारण उनका प्रारंभिक जीवन संघर्षमय रहा। उनकी बचपन से ही पढ़ने में बहुत रुचि थी। १३ साल की उम्र में ही उन्‍होंने तिलिस्म-ए-होशरुबा पढ़ लिया और उन्होंने उर्दू के मशहूर रचनाकार रतननाथ 'शरसार', मिर्ज़ा हादी रुस्वा और मौलाना शरर के उपन्‍यासों से परिचय प्राप्‍त कर लिया। उनक

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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--जयशकर असाद स्व० श्रीजयशकर प्रसाद! का जन्म 'सँघनों साहु! नाम एक प्रतिष्ठित तथा थनी वैश्य परिवार में १८८९ ई० में हुआ था। प्रसादजों ने अग्रेज़ी दो ८ वें दर्ज तक को शिक्षा घर पर पाईं। १५ वर्ष की भायु में दी थे लिखने छगे थे। प्रथम उनकी एक कविता १९०६ ई० में भारतेन्दुः में प्रकाशित हुई थी । प्रसादजी ने नत्रीन युग का द्वार हिन्दों में सोला था। वे कबिता कौ नवीन धारा के प्रदर्त और उसके सर्वभान्य श्रेष्ठ कवि थे। द्विन्दों के नाटक साहित्य में उनकी देन सबसे अधिक है और वे हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ नाटककार फे रूप मे भी विज्यात हैं । कथा-साद्दित्य भी उनसे कोतिवान्‌ बना है! १६११ से, जब हिन्दी के अपने मौलिझ कद्दानी छेखऋ नहीं थे, तबसे उसके भाण्डार को उन्होंने भरा है। साहित्य के इन विविध अगों को पूर्ति के साथ साय उन्होंने साहित्य तथा खोज सम्बन्धी निवन्ध भी लिख हैं, जिनका स्थान साहित्य में बहुत ऊँचा है । मधुआ




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