छन्दोग्य उपनिषद | Chhandogya Upanishad

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Book Image : छन्दोग्य उपनिषद  - Chhandogya Upanishad
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(३) ते लि रे प्रवाक-एए | शक्वरीसामफा छोकों से सम्बन्ध और हि उसके ज्ञान का फट +«>१७--७९ ! रेचतीसाम का पशुओं से सस्वन्धऔर उसके ज्ञान का फल ज-हैंद--<० यशज्चायशिय साम का आगों से सम्बन्ध और उसके शान कानफल +« १९५०-4० !' राजन साम का देवताओं से सम्बन्ध , और उसके ज्ञान का फल >> २०-६१ * ध्रयाविद्याआदि' फी हाष्टि स साम की उपासना भौर उसका फल ५ »«०२१--८९ साम में कौन स्वर भ्रहण के योग्य / और फौन त्याग के योग्य हे >+२९--८३ साम गाते समय मन में क्या संकल्प दोनचाहिये २०-८४ बर्णो फे उच्चारण की शिक्षा आदि «२२१०-4५ | धर्म के तीन बड़ेस्कस्घों का वर्णन « और अमखतस्व के लिये झफार की उपासना >>रे३--4७ साम य्षों में तीनो सबने द्वारा यज़माम को तीनों छोक फे देवता् से फल की प्राप्त »« र२४--4८ तासरा भ्रपाठक जपासनाविशिष्ट फर्मा फा मिन्नर फल शौर इसरद्रस्य के जानने का फल ० ैहै5११-९१ बनतरैरेूञ१०*६शीयनी से ब्रह्म की उपासना पांच द्वारपालं के शान पूर्वक हृद्यस्थ बढ़ा की उपासना और फल «१३--११० *सचे खल्विदत्नह्म'! से आरस्मकरके, शाण्डिल्य का वह प्रसिद्ध उपदेश जो भल्ञप्य के अपने इढ़ विश्वास पे चर्म प्राप्ति फा पूरा साधन चलाता हैघीर और दीघायु पुत्र की प्राप्ति के साधन- विराट्कोश का विज्ञानब्-न्हंप--ह१8>+११--११६




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