खरी - खोटी | Khari - Khoti

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Khari - Khoti by कान्ता नाथ पाण्डेय - Kanta Nath Pandey

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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खरी-सोटी इसमें पड़ी सुपारी चार। जेसे सड़कों पर कतवार ॥ इसमें सटी लॉग इस भाँति। जेसे वरु से पक्ञी-पाँति॥ भ्द भ्द | कितने ही जन' खाते पान, ओर थूक देते तत्काल! कितने झुँह के पहिले दी, फर देते कपड़े हैं. लाल!! >< र< ५ कितने अपने घर के घौच, थू थू करते हैं दिन रात! कितने यों खाते हैं. पान, जेसे बकरी तर के पात!! 94 ९ भर २७




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