राजकलश | Rajkalash
श्रेणी : साहित्य / Literature

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Add Infomation AboutAmar Bahadur Singh Amaresh
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
129.48 MB
कुल पष्ठ :
414
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)२ राजकलशकड़े-सानिकपुर के क्िले में--मनाने आए थे | जौनपुर की गोमती
नदी उन्हें शांति न दे सकी, इसलिये वह गंगा की उत्ताल तरंगों सें
शांति खोजने आए थे । कड़े का क्रिला क्या था, मानो प्रकृति की
मधघुमयी हरीतिमा की गोद में श्वेत-चसन-घारी नादान शिशु लिपटा
हो। दक्षिणी छोर पर गंगा की पायन लहरें उसे थपकियाँ दे रही
थीं। शेष तीन ओर आम, महा, करील, रीयाँ एवं ढाक के सघन
बक्त फेले हुए थे । क्रिले के ऊपरी भाग पर शाह का संडा लद्रा रहा
था, और जंगल में चारो ओर सैनिकों के शिविर पढ़े थे ।
शाह के साथ उनका विश्वास-पात्र सूबेदार बाबर सैयद भी
सपरिवार किले के दक्षिणी भाग सें डेरा डाके पड़ा था । उसके साथ
उसकी पत्नी और इकलौती बेटी सलसा के अतिरिक्त सलीम-नामक
शक नवयुवक भी था, जिसका विवाह, निकट भविष्य में, सलमा के
साथ होनेचाला था |
सूबेदार बाबर सेयद किले के ऊपरी कच् में अकेले बेठे कुछ सोच
रहे थे। पास ही एक तिपाई पर मदिरा की सुराही रक््खी
थी, और उसी से मिला हुआ चाँदी का एत्र । उनकी मसनद से '
लगी फ़शी रक््खी थी, जिसकी चिलम की आग ठंडी हो चुकी थी,
कितु तंबाकू की सुबास संपूरं कक्ष को अब भी सुवासित कर रही
थी। पास ही करोखे से किले का वह भाग स्पष्ट दिखाई पढ़ रहा
था, जहाँ राज्य-लिप्सा के वशीभ्रूत होकर अलाउद्दीन खिलजी ने
झपने चाचा जलालुद्दीन की हत्या की थी | बाबर सैयद सोचते-
सोचते कुछ उद्धिग्न हो उठे । उनके मन में अ्रचानक ही यह भावना
उठी कि वह इतिहास की पुनराघृत्ति करें, और शाह शक्की के साथ.
इस ऐतिहासिक दुर्ग में वद्दी व्यवहार करें, जो अलाउंद्दीन ने अपनेचाचा के साथ किया था । कितु वह ऐसा न कर सके 1 एक लंबी
साँस छोड़कर उन्होंने पुकारा--_बज्क
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