कहरानामा और मसलानामा | Kaharanama Aur Masalanama

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : कहरानामा और मसलानामा  - Kaharanama Aur Masalanama
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अमरबहादुर सिंह अमरेश - Amar Bahadur Singh Amaresh

Add Infomation AboutAmar Bahadur Singh Amaresh

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
( ४) किया है । श्राचायं शुक्ल जी के पदमांवत में “स्तुति-खंड' से लेकर 'उपसंहार' तक ४८ खंड हैं किन्तु इसमें केवल ३० हैं ।. पांडुलिपि का प्रथम-फृष्ठ न होने से प्रारम्भिक दाब्द नहीं मिलते । हाँ, पदमांवती के श्रंत में--''इती श्री पदुमावती कथा संपू“1न सुभ मस्तु ॥ सुभ।॥ इसके पदचात्‌ नीचे बाईइं श्रोर लिखा है-॥ ली!ः मनहास:: इससे स्पष्ट है कि इस पांडुलिपि के लेखक श्री मनदास जी हैं ।श्री मनदास जी कौन थे, कहाँ के रहने वाले थे, इस सम्बन्ध में बहुत कम ज्ञात हो सका है । किन्तु उन्होंने किस प्रकार जायसी की पांडु लिपि प्राप्त करके उसकी प्रतिलिपि की, यह कहानी बहुत रोचक है। सत्तनामी-सम्प्रदाय के भ्रादि गुरु जगजीवन साहेब (कोटवा) के चार दिष्य _ थे--गोसाइईंदास, दूलनदास, खेमदास तथा देवीदास । ये ही चार “शिष्य गदियाँ” सत्तनामी-सम्प्रदाय के “चार-पावे” कहे जाते हैं । महात्मा दूलन- दास ने €० वर्ष की ्रायु में दूसरा विवाह किया । जिससे “रामबख्स” नामक पृत्र की उत्पत्ति हुई । श्री रामबख्श जी श्रच्छे कवि एवं जायसी के ग्रन्थों के संकलनकर्ता हैं । इन्होंने जायसी के ग्रन्थों की प्रतिलिपि को । उसी पांड्लिपि की यह प्रतिलिपि है जिसे श्री मनदास जी ने लिखी है । इसका प्रमाण लेखक मनदास जी ने स्वयं “पदुमावती' के श्रन्त में पांडू- लिपि लिखने का कारण बताते हुए लिखा है ।सत्य गुरु समरत्थ साहेब, राम बकस प्रमान हैं । . तिन लिखायो ग्रन्थ यह पढुमावती . परमान है ।शर्ट जद श्रसाहेब राम बकस कहि दीन्हा . . लिखि पढुमावत पुरन कोन्हा .. उक्त दोनों उद्धरणों से मेरे कथन की पुष्टि हो जाती है। इस पांडु लिपि के लेखक श्री मनदास सत्तनामी-सम्प्रदाय के थे । उन्होंने अपने गुरु




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now