मूल - सुत्ताणि | Mul Suttani

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Mul Suttani by मुनि कन्हैयालाल - Muni Kanhaiyalal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अ०४ ] दसवेबालियम॒त्तं १७ ने धटुज्जा ने भिदेश्ञा- अन॑ न आलिहावेज्जा न विलिहावेज्जा ने घद्ठावेजा न भिदावेज्जा अन्न आतिहंतं वा विलिहंतं वा घटंतं वा भिदंतं वा न समणजाणेज्जा जावज्जीवाए तिविहू तिविहेणं मणेणं वायाए काएण॑-- ने करेमि न कारवेसि- करते पि अन्न न समणुजाणामि- तस्स भत्ते ! पडिक्कमामि निदामि गरिहामि अप्याणं चोतिरामि ॥ १४ से भिक्‍यू वा भिक्खुणी वा- संजय-विरय-पड़िहुय-पज्चक्खाय-पादक्कमे- दिआ वा राओ वा- एगओ वा परिसानओं वा- सुत्ते वा जागरमाणे वा- से उद्गगं दा जोस वा हि वा महिय॑ वा- करगं वा हरितणुगं वा सुद्ोदर्ग बा- उदउल्ल वा कार्य उदउल्ल वा दत्वं- ससिणिद्ध वा काय॑ ससिणिद्ध वा बत्य॑-




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