मालकौंस | Malakauns

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Book Image : मालकौंस  - Malakauns
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तीन जननदी वी रेत परपानी से अभी-अभी निवले ऊदविलाव की धूप म॑ चमकती मूछें देखने वे बादबह छोट-छांट पीले फूलो से लदबबूल पे जगल पार वरअपने लाल खपरेल और हरी जाफरीवाले मवान में लौट आया।दरवाज़ा सोलने वे वादकिसी नारी-कठ ने दवी आवाज़ से पूछा था“कौपन २”हालांकि वह अबेला रहता था।बरामदे का हरा लवडी वा दरवाज़ा खोलकरकिसी के बाहर निकलने की आहट हुई थी, ओर उसने सहमी आवाज़ में पूछा था-- “कौन | !!चहा तो कौन था २ बहने वी तीन जन--- मानव तन, मानव सन, ओर सनसन पवन |1980मोलकौंस 2




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