भील क्रान्ति के प्रणेता मोतीलाल तेजावत | Bhil Kranti Ke Praneta Motilal Tejavat

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Bhil Kranti Ke Praneta Motilal Tejavat  by प्रेमसिंह कांकरिया - Premasingh Kankariya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ओऔ दरामनाशयण घौधरी का यद्यपि पहले राजस्थान के क्रान्तिकारी दल से सक्रिय सहयोग रहा, डिन्‍्तु बाद में सेठ जमना लाल बजाज झौर महात्मा गांधी के सम्पर्क में भाने पर वे वर्धा चले गये भौर इनका क्रान्तिकारी भान्‍्दोलन से सम्बन्ध न रहा श्री विजमसिह प्रथिक प्रारंभ में क्रान्ति के सूप्रघार रहे किन्तु वाद में जन-जागरण झौर लोक सेपा फे महत्वपूर्ण क्षेत्र में कायंशील रहे. ये विजोलिया के प्रसिद्ध किसान सत्याग्रह के प्रवर्तक थे- यह मेवाड़ के सामन्‍्ती भ्रत्याचारों के विएद् रियासतों में होने चाता सर्वप्रथम भ्रट्िसात्मक भ्रानदोलन था. जो निरन्तर चार घपप तक चलता रहा. झधिकारियों ले भारी दमन-चक्र चलाया. सत्याग्रह में महिलाप़ों ते भी काफी भाग लिया. सन्‌ 1922 में ए. जो. जी. के बीच बचाव से बिजौलिया के जागीरदारों को किसानों से समभौता करना पड़ा. वेगार भौर बैजा लागतें समाप्त की गई. किसानो की पंचायतों फोो मान्य किया गया. पंचायतों को किसानों के मामले तय करने का अधिवगर दिया गया. भूमि का स्थायी प्रबन्ध कर राजस्व निश्चित करना मान लिया गया. ब्रास्दोलन के समय रचनारमक कार्य करने से किसानों मे सामाजिक एवं झाधिक दत्टि से स्वावलंबन की भावना उत्पन्न हुई, 1927 में भूमि का बन्दोवस्त तो हुमा, किन्तु किसानों के साथ स्याय नही किया गया. किसानों को पुनः सत्याग्रह का झाश्रय सेवा पड़ा, श्री हरिभाऊ उपाध्याय के प्रयत्त से 1929 में सभ्रता हुआ्रा, किन्तु राज्य द्वारा उसकी भूमि नहीं लौटाने के कारएा सन्‌ 1931 में किसानों को एक बार फिर सत्याग्रह की शरश 'लेनी पड़ी. झन्त में श्री जमतना लाल जी बजाज की मध्यस्थता से समभौता हुमा... इस भ्रकार बिजौलिया सत्याग्रह सामन्तशाही के विरुद्ध जनन्‍जागरणा के इतिहास में ग्रपना मुझ्य स्थान रखता है. यहां का किसान सत्याग्रह शायद इस युग का प्रथम प्रहिसक संघर्ष है. “चम्पारण का सत्याग्रह” इसके ठीक बाद की घटना है. ग्रोविन्द गुरु बी ह हे +.. राजस्थान मैं क्रात्तिकारी श्रांदोलन धीरे-धीरे समाप्त हो गया, कुछ फुटकर घटनाएं ही यत्र-तत्र होती रही, सन्‌ 1919 के पश्चात्‌ महात्मा गांधी के भारतीय राजनीति में प्रवेश करने पर जन-प्रान्दोलन ने अहिसात्मक स्वरूप गहरा कर, लिया. राजस्थान एवं गुजरात के प्रादिवासी पंचलों में गोविन्द गुए द्वारा चलाए गए प्रांदोषन का महत्वपूर्ण स्थान है. घोषित, उत्पीडित एबं पिछडी भील-मीणा जाति में सुभारवादी क्रान्ति करना ही उनका मुख्य उद्देश्य था. उनका सम्पूर्ण जीबन इसी उ्दृश्य की पूर्ति के लिए समपित भा, के. ->- अचल




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