ढलती फिरती छाया नाटक | Dhalati Firati Chhaya Natak

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
136
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)* उलती फिरतो छाया नाटक । श्छ
मोजीराम--थारोई जोमा हा। महेतो आज या बातई:
देखे घा। )
लिछमो--बस के, जणातों वेरों पश्यो ।
मोजोराम--जद मो अया जौमण लाग ज्यावागा तो
श्रोजु थे जोसणेको नामई कोनो लेवोगा। धम्प्रमूत। यो तो
उलटा हाथाई घो घव्पा करे है।
' ( इतणाम सुरली खेलतो २ आते है )
सुरलो--( मोजोरामने देखकर ) भ्रा-हा--रे। अगड
घत वावी आयोरे। बाबा! रादकिशन २ बोल 1
मोजोराम--धत्तेरो नानौको नाक काटु। बोख, शहरी
ओडरी। सोताराम, सीताराम बोल।
सुरली--( नाड इलाकर ) बाबा ! रादाकिशव | रादा-
किशन | बोल।
मीजोराम--क्ोनी मानेके | सार खायगो के १
सुरनी--( हाथका प्रसारा्स) वाया। यो देख तेरी पगडी
जुप्टामें रादाकिशन बे व्यो है।
मोजीराम--( पगडी छुपे फीककर ) या वाले, देखा
इब बी कठे बेठेगो। वावला बेटा! चोरकों नाम नह
लिया करे है ।
मुरलो--बो चोर कया है। त'धोर होगे।
मोजोराम--तेरो नानु चोर है। सेंय्यू चोर छ।
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