हिन्दी विपूवकोष | Hindi Vipoovakosh

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Hindi Vipoovakosh  by नगेन्द्रनाथ बसु - Nagendranath Basu

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शिंशुपास्थल--शिक्य १६ ऋणगैिदगें लिखा है, कि पद कोप्टनिमित रथ अति- _ शप हढ़ होता दे। “भोजोधेष्ट स्पन्दने श्िशप्रया ( ऋक संपश१६ ) २ जशोकका इक्ष । ' शिशुतस्थक्ष (स० की० ) एपानभेद । । शॉशपास्थक देखो | शिशुप्तार ( से० पु० ) शिशुप्तार, सःस नामक अलजस्तु। ( ऋक १॥११६॥१८ ) शिद्वान ( स० क्ो+) १ छौहमछ, मरखाई। ४ कॉचका वरतन। वेछटि। शि(स'०पु०) १ मिच, महादेव ! ३ शान्ति । 8४ भैय्यां । | शिक्षज्ञा ( फा० पु० ) ३ दबाने, कसने था सिचोडनेका परत ! २ प्रेच कसनेफ्ा परत या चौजञार जिससे शिहद- ब'द फिताये' दवाते भर उसके पन्‍ने हाटते हैं। % पेरने- का यन्‍्ल, फोल्दू। ७ रुई दवानेक्नी कल, पेंच । ८ प्रानोन कालहा अभपराधियों'का कठोर दृणड देनेशे छिये पंक गर्ल शिखमें उनकी टांगे कस दी जाती थीं॥६ घद तासा मिससे झुलादे धुप्रावदार वद्‌ बनाते भौर पतनिक बांधते ईैं। जशिड्मन ( फा० स(त्री० ) सिकुहनेस पढ़ो हुई घारो, छुड़ कर दबनेसे पड़ी हुई छभोौर, सिलयट ! शिक्षण ( फः० पु० ) डर, पेट ) शिह्षप्ी ( फ़रा० बि० ) पेट-समंस्धो। निश्ञकता, जपना । शिक्ष्मों कापुस धार ( फा० पु०) यह काश्तक्वार जिसे जीतनेक लिये खेत दूसरे राशवश्तारसे मिला दो । इसका दक खास फराएतद्वारवे हकले बहुत्त कम दोत! है । शिकरा ( फा० पु० ) पत्र प्रकारका बाज पक्ठी | शिक्रया ( अ० पु० ) शिक्षायत, उलाहना 1 शिकस्त ( फा० खो० ) ३ द्वाए, पशाजय, मात 1 २ सांग, इटमा। ३ विफदतता, असिद्धि शिघ्चस्ता ( फा० यि० ) १ भन्‍न, हटा हुआ । ( ख्रो० ) २ ३हूँ या फांरसोक्ो घसीट छिखादद) ' शिद्वायत ( अ० खो० ) १ घुराई करता, चुगलो, भिक्रवा1 द शिखी मूल, से <, दोष आदिक्ञो बातों मनमें दो । ३ डपालश्स, उलाहना । शीमारी । २ खुब, सौमाग्य 1 ४ शारीरिक अशरथता, सेंग, शिह्तार ( फा० पु० ) १ जब पशुओोकोा मारनेका कार्य या क्रोडा, माखिट, सुगंध! । ६ वह जानवर जो मारा गया दी! दद्ाद्वार, भदह्य। ४ कोई ऐसा आदमी जिसके फ सने या वशर्मे हॉमेसे बहुत लाम दो, मसामी ७ गोइत, मांस । शिक्वार गड़द्ा (द्वि० पु० ) बद बड़ा गइदा जे शिक्रारी ज्ञानश्रों के फ सानेके लिये खोदने है | शिक्षास्माद ( फा० खो० ) शिक्षार खेछनेका स्थान। द्िड्तस्वाद ( फा० पु०) बड़ तस्मा जे। घाड की दुमके पास चारज्ामैक पीछे शिकार छटकाने या आवयश्पक सामान वांधनेके लिये लगाया ज्ञावा है ! शिकारो (फा० पु० ) ९ आखेट फरनेवालां, शिक्रार करने- बाला, गदिरी ) ( धि० ) ४ शिकार फ़रनेवाछा, अडूलो वशुओंको पकड़ने या मारनेत्राछा | जेसे,--शिक्तारी कुत्ता । ३ शिक्रास्में काम्र फरनेबाल्ा । जैसे,--शिकारों कोट, शिकरारों लेमा। शिक्राल ( फा०9 पु० ) बद थोड़ा जिसदा झगछा दादिना चैर और पिछला दांप! पैर सफेद दे । यदद दैपो माना ज्ञाता है । शिक्ष ( सं० बि० ) गश्थवसायी, बिनो रोजगारका । शिक्ष ( स'० छरि० ) मधघुनात द्रष्यविशेष, मधूच्छिएक, मोम । पर्याप--शिक्थर, मधुज, विधत्त, मघुसम्भव, ोदन, काच, . उच्छिए, मशिकामर, क्षौद्य, पीतराण, ह्निग्ध, मश्िक्राज, क्षौद्रण, मचुशेष, द्रायफ, भश्िकाभय; मघृत्यित, मधूटय । गुण--विच्छिल, खादु, कुछ, बात सौर अल्लनदेषनाशक, म्दु, फटु ओर फ्सि्घ । इसका अछेप देनेस स्फुटिताडु: विलेपन अर्थात्‌ शरीरका ऋदा दुआ रुधान उत्तमझूउसे निराकुत दोता दै। ( राजनि० ) शिक्थक (स'० छ्ली०) शिक.ध-स्वाये' ऋन। शिक्न थे, मेम गिवय ( स० क्लीौ०) संस (ससे; शिक्ुद-किय। उस ४1१६ ) इति यतह्‌, सच किस, कुडागमः शिरादेशश्व | १ छतमे ऊड़कता हुआ रघ्सीका जालोदार स'पुट झिस पर दूध, दुद्दी आादिवण मटका रखते दे, छोका, सिवदर | प्रथाया--काच, शिकपा, शिक््‌। २तराजुकों रस्सो। ४ बंद गोफे देशनो छोरें। पर बंधा हुआ रम्सीका जाल जिस पर वोफ रखते है ।




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