साँझ उतरी | Sanjh Utari

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
879 KB
कुल पष्ठ :
156
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)जीवन को हलतो बेला मेंजीवन की ढलती बेला में, विदा मागमे के इस क्षण,
कोई साथ नही है मेरे, सूनी-सूनी शाम है ।सब खामोश हो गई हैं श्रावाजें श्रनगिन अपनो की,
जैसे सहसा मौत हो गई इदद्रधनुप से सपनो की,भ्रौर एक भ्रधियारी चादरअम्बर से ऐसे उतरो---सारे पथ हो गए प्रपरिचित, दिशा दिशा गुमनाम है !तैईंस
User Reviews
No Reviews | Add Yours...