रेत और रेखा | Ret Aur Rekha

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Ret Aur Rekha by रामानन्द - Ramanand

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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न सॉगो वरदान इन प्रतिमाओ से, वन्धु, तुम न मागो वरदान, देवी और देवताओं को तुम रहने दो रूठे, मुख फेरे , फेर लो तुम मुख इन जड प्रतिमाओं से, न माँगो मुस्कान ११




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