मोती सूखे समुद्र का | Moti Sookhe Samudra Ka

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
919 KB
कुल पष्ठ :
136
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मेहमान बन मुस्वान आई है
रोद ले उल्लास वो
हर उमर की देहरी पर
जिदगी ने
खुशी वी एप घडी पाई है
सास अपनी
बही बैेपर्दा
नहो जाये
गरल पीकर ही कोई
क्षण अमर बनता है ।
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