ब्रह्मसूत्र शांकरभाष्य रत्नप्रभाव | Brahm Shutra Shankarbhashya Ratnaprabha

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Brahm Shutra Shankarbhashya Ratnaprabha by कृष्ण पन्त शास्त्री - Krishn Pant Shastri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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की । इस पर्वपक्षका खण्डन [ सिद्धान्त ] सूत्र--भूतेषु तच्छृतिः ४९1३॥५ प्राणोंसे सम्ऐ्क्त जीव देहके बीजभूत सूदषस भृतोंमें रहता है ... . सूत्र--नैकस्मिन्‌ दशेयतो हि ४॥९।२॥६ अन्य शरीरकी प्राप्तिमं जीव केवल तेजमें नहीं रहता आसत्यपक्रमाधिकरण 28२४७ [० १४०१-२४ १ शक फ डक फी .._ थे अधिकरणका सार ३३७ शत «०. २४०९-०६ ... सूत्र--समाना चारुत्युपक्रमादग्दतत्व च॑ नुपोष्य ४।२४।७. कक २४०९ - 11 .. विद्वान और अविद्वानकी गति मिन्न-मिन्न हैँ | पूवपक्ष | .... २४१०-०२ .. विद्वान और अविद्वानकी गति समान ही है [ सिद्धान्त | २४१२ - २ द संसारव्यपदेशाधिकरण ४/२।५।८-११ [० १४११-२४१८। ... म अधिकरणका सार दे बल ««». २४१३ - १५ ..... सूत्र--तदाब्पीतें: संसारव्यपदेशात्‌ ४॥२७॥८ ._ ««* २४१४ - 1 ..._करणसहित तेजकी त्द्यासम्पत्ति आत्यन्तिक होती हे [पूवपक्ष २४१४ - ८ . तेज आदि भूतसूक्ष्म सम्यक्‌ ज्ञानसे जब तक मोज्ञ न हो तब तक .. रहते हैं [ सिद्धान्त | ... के ,.. २४१५- ४ ..._ सूत्र--सक्ष्म प्रमाणतश्र तथोपरब्धेः ४३७७५... हे २४१६ - ६ .. जीबका आश्रय इतरभूतसहित तेज स्वरूपस और प्रमाणसे सूक्ष्म है. २४१६ - १७ ... सूत्र-जनोपमबुनातः डाराणीव१० | ... २४१४ - १६ .. स्थूछ शरोरके उपमदसे सूक्ष्म शरीरका नाश नहीं होता है... २४१७- २६ ..._ सूत्र--अस्येव चोपपत्तिरेष ऊष्मा डाश५ा१ी) «»«« डा २४१८ - १ .. सूक्ष्म शरीरकी रष्णता स्थूछ शरीरमें उपलब्ध होती है. .... १४१८० १० ० प्रतिषिधाधिकरण 9१६। १९-१४ [४० २०१९-२०१७| .. ६ छ अधिकरणका सार ० ०. २४१९-३६ ... सूत्र--अ्रतिषिधादिति चेन्न शारीरातू ४२६॥)२ ««« २४१९ - १३ .. बद्यवेत्ताके श्राणोंका भी शरीरसे उत्कमण होता है [ पूर्वेपक्ष ] २४२० - २ - रेदध२२ है कर हे हे । सूत्र-स्पष्टो ह्ेकेषामू ४1६११ .. ब्रह्म॑तखवेत्ताके प्राणोंका देहसे उत्क्मण नहीं द्वोता | सिद्धान्त | ..... दक्त सिद्धान्तमें आतभागके प्रशनका कथन पा द .... पञ्चमी और पष्ठीके पाठभेदसे भी देहसे उत्कमण प्रतिषिद्ध होता हे ... सूत्र-स्मयते च डाराहवि४ ० 3 गति और उत्क्ान्तिके अभावमें महाभारतका वचन कक: जल * कर्क क रा कला ओ 1 कह २४२० - १८ २४२२ - १: पृष्ठ पडक्ति ०५४०५ “* ७ मंडे + व बछुं०ण खत न २४०६ - २१ ब४०७ - ५ 1 २७२४ - ३ * रे ४ जे स्त हा हा करत जा, ०




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