मछली - जाल | Machli-jaal
श्रेणी : कहानियाँ / Stories

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4.45 MB
कुल पष्ठ :
176
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)हुस्न और देवान ११
बातें करती दें । तेरी सब शोखी निकाल दूँगा । ज्ञरा ढ्दर, तो पदले
सुक्ते इससे चिंबट लेने दे, क्यों-बे उदलू के पटुठ़े +””
उल्लू के पट्छे ने हॉपते हुए कहा--“'मैं, मैंने कोई अगवा नहीं
किया 1?”
“ले इसी तरद रददने दो” दजूर ने फेसला सुनाया “जब तक दम
खाना वगेरा खायेंगे ।”
यह कटकर उन्दोने सु इ फेर लिया झौर बनिये से बातें करने लगे,
“में मौज़ा घेरकोट से शा रद हूँ। यद किसान इस खूबसूरत लड़की
को श्रगवा कर लाया दें, चार दिन से मारा-मारा इसकी तल्ञाश में घूम
रद्दा था । झाज ये दोनों झाशिकनमाशूक दाथ लगे । कोहाले से पार जाने
की कोशिश में थे, लेकिन मै इन्हें कब छोड़नेवाल्ना था । में उस रास्ते
को सूघ लेता हूँ जहाँ से एक॒बार सुजरिम गुजर गया दी । अब यद
बदमाश इकबाल नदी करता, एक तो जुर्म किया उस पर यह सीना-
ज़ोरी 1”?
बनिया दाथ जोदकर बोला--“इजूर, दम तो दुजूर के जान-माल
को दुआये देते दें । श्राप दी की कृपा से इलाके में बिलकुल शान्ति है ।
चोरी-चकारी, ढकैत्ती का लगभग खात्मा हो गया हैं। ये किसान ल्लोग
यड़े बेशमं होते हैं । भ्रब इसकी भ्रोर देखिए । दूसरों की बहु-बैटियों
को ताकना न्हाँ की शराफत हैं श्र फिर उन्दें भगा के जाना, राम !
राम ! दजूर ऐसे झुजरिसों को तो पूरी-पूरी सजा सिलनी चाहिए ।””
दजूर ने उस नौजवान लड़की की शोर ताकते हुए कहा--''कानून
यद्दी कद्दता दें शाइजी ! दम तो कानून के चन्दे हैं। झगर कोई झरावा
करेगा या किसी की बहू-्बेटी पर हाथ ढातेगा तो इम उसे जरूर
सुजरिस ठहरायेगे घर उसे सज्ञा दंगे । वद्द सुरगा झापने अभी तक
दलाल करवाया है या नहीं । शाइबाज ! शाइजी से चद्द सुर्र लेकर
दलाल कर ।”'
नौजवान किसान का चेहरा जुमीन से लगता ला रद्दा था । उसके
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