पाँच कहानियाँ | Paanch Kahaniyan
श्रेणी : कहानियाँ / Stories, साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutSri Sumitranandan Pant
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6.06 MB
कुल पष्ठ :
112
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about श्री सुमित्रानंदन पन्त - Sri Sumitranandan Pant
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पाँच कहानियाँ झान्त एवं पराजित हो अन्त में पीताम्बर ने एक तम्बोली की दूकान में पान लगाने की नौकरी कर ली पर वहाँ भी वह अधिक समय तक न ठहर सका । उसकी छुटेवें उसका दुभाग्य बन गई थीं । और एक रोज़ दूकान पर पान खाने को आइ हुई एक वेश्या के रूप-सम्मोहनन के तीर से बुरी तरह घायल हा उसने शाम के वक्त चुपचाप गल्ले की सन्दूक़ची से पाँच रुपए का नोट चुराकर अपनी विपत्ति-निशा की कालिमा को एक रात के कलंक से और थी कलुषित कर डाला । उसका स्वास्थ्य अभी खराब नहीं इुआआ था । उसके अविविवाहित जीवन सबल इन्द्रियों की स्वस्थ प्रेरशाद्यों का समाज अथवा ससार क्या मूल्य आँक सकता था क्या सदुपयाग कर सकता था ? फूल की मिलनेच्छा सुगन्ध कही जाती है मनुष्य की प्रणयेच्छा दुगेन्थ उसे निमल्र समीर वाहित करता है इसे कल॒षित लॉकापवाद । नर-पुष्प के वीये का गीत गाता हुआ भौंरा चृत्य करता हुआ मलयानिल खी-पुष्प के गम में पहुँचा आता है मनुष्य की बीयें॑ वेवाहिक स्वेच्छाचार की अच्छी कोठरियों पाशविक वेश्याचार की गन्दी नालियों में सदस्र प्रकार के गहित नीरस कृत्रिम मसेथुनों द्वारा छिपे-छ़िपे प्रवाहित हेता है यह इसलिए कि हम सभ्य हैं मनुष्य के सूर्य को जीवन की पवित्रता को समक सकते हैं । असंख्य जीवों से परि- पूण यह सृष्टि एक ही अमर दिव्य शक्ति की अभिव्यक्ति है प्रकृति के सभी काये पुनीत हैं मनुष्य-मात्र की एक ही आत्मा है-- कन्या थ्ट्र्द्
User Reviews
No Reviews | Add Yours...