पाइअ - सद्द - महण्णवो ( प्राकृत-शब्द-महार्णवः ) | Paia-Sadda-Mahannavo (Prakrita-Shabda-Maharnava)

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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संकेतसम्मत्त सम्य सम्यक्त्वों सासार्घ सिंक्खा सिग्घ सिरि सुख सुज्ज सुपासुरसूत्रसूभ्रनि सुक्तसुमन स्वप्तहम्मीर द्वास्यहि|1]॥||॥ ॥ ॥ |1]|!ग्रन्थ का नामसम्पक्व्वसप्तति सटीक सम्पक्ट्वस्वडूप पीसी सम्यक्वोरपादवि धिकुलक सामान्यगुणोपदेशकुलक गणघरसार्धशतकप्रकरण शिक्षाशतक सिग्घमवहरउ-प्मरण सिरिसिरिवालकहा( ११संस्करण श्रादिदे० ला० पुस्तकोद्धार-फड, चर्म्बई, 7६१६६झ्रंवालाल गोवर्घनदास, वम्वई, १६१३ १ हस्तलिखित353जौहरी उुस्तीलाल पन्नालाल, वम्वई, १९१६ पे हस्तलिखितस्व सपादित, कलकत्ता, सवत्‌ १६७८दे० ला पुस्तकौद्धार फडः वम्बई, १६९३सुखवोघा टीका (उत्तराध्ययनस्य) ६ हस्तलिखितसुर्यंप्रजञप्ति सुपासनाइचरिम्र सुरसुदरीचरिश्र सुश्रगडांगसुत्तसूत्रकताज्धनियु किसुक्तमुक्तावली सुन्रऊुतागर्चूणिसेतुबंघस्वप्नवासवदतत हम्मीरमदमदेन हास्यचूडामणि (प्रहसन) हितोपदेशकुलक हिततोपदेशसारकुलक हेमचन्द्र-प्राकृत-व्याकरणहेमचन्द्र-काव्यानुशासनश्रागमोदय-समिति) वम्बई, १९१९स्व-संपादित बनारस, १६१८-१६जैन-विविघ-साहित्य-शाक्न-मालाः वनारम, १६१६ + १ मीमसिह मायोक, चवरई, १९६ ३६२ श्रागमोदय समिति, वर्वई, संवत्‌ १६१७१ इस्तलिखिच२ भ्रागमोदय-समिति, बवई, सवत्‌ ६६७३३ भीमसिंह माणऐक 3. 3 है ९.र६दे० ला० पुस्तकोद्धार फंड, ववई, १९२२15निणुयसागर प्रेस: बवई, १८९१४श्रिवेन्द्र-सस्कृत-सिरीजगायकवाड श्रोरिएन्टल सिरोज, न, १०, १६२० प' हस्तलिखिंत # रै डॉ, श्रार्‌ पिशेलू-सपादित, १८७७४२ वंबई-सस्कत-सिरीज, १६००निएुंँयसागर प्रेस, बंवई, १६०११ ख्रद्धेय शीयुत के प्रे, मोदी द्वारा प्राप्त । $ देखो “उत्त' के नीचे की टिप्पणी 1जिसके श्रक दिए गए हूँ वह पत्र गाथाशत१ * * श्रव्ययन, गाथाके थि के पाहुड प्र * परिच्छेद, गाथा श्रुतस्कंघ, श्रष्य ० 3 श्रतस्कघ 4 स्न्य गाथा3 पृश्नश्राधासक, पत्र पु रह र्गायाजीपद, सुर+सुच के भ्रंक इन दोनों में भिल्‍त भिन्न हैं, प्रस्तुत कोष में सूत्नाक केवल भी, मा के संस्करण के दिए गये है ।




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