वज्रांगबली हनुमान | Vajarangbali - Hanuman

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Vajarangbali - Hanuman by पंडित कमलकुमार जैन शास्त्री -Pt. Kamalkumar Shastriश्री फूलचंद्र - Shri Fulchandra

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पंडित कमलकुमार जैन शास्त्री -Pt. Kamalkumar Shastri

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श्री फूलचंद्र - Shri Fulchandra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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दर धर्म-द्शन अथवा लोकधमं का प्रतिपादन ही है। उक्त ग्रन्थ प्राचीन है (१६१६) अतएव इसको उसी काल की काव्य॑-कला के मापदण्ड पर नापना उचित होगा । ग्रस्थकार ने जिस भक्ति भावना से प्रेरित होकर इस धर्म ग्रथ का प्रणयन किया है यदि उसी भूमि पर उतरकर विज्ञ पाठक पठन-पाठन करेगे तो उन्हे उस अलौकिक पंरमानन्द का आभास अवश्य होगा जिस उद्द श्य से इसकी रचना हुई है । विश्वास है धर्म प्राण प्रेमियों के बीच कि ब्रह्राय जी का यह ग्रस्थ विशेष श्रद्धा का अधिकारी होगा। - प्रस्तुत ग्रस्थ को प्रकाश मे लाने का सारा श्रेय पंडित कसल- कुमार जी को है जो अध्ययनशील खोजी प्रवृत्ति के पारखी पडित हैं । साथ ही कविवर फूलचन्द जी पुष्पेन्दु के परिश्रम की भी प्रशसा कहे विना न रहूँगा जो भाषाविद और साहित्य रसिक ही नहीं मिशन स्प्रिट से काय॑ं करने वाले विद्वान हैं । ये दोनो विद्वान साधुवाद के अधिकारी हैं जिन्होंने मुझे कुछ कहने के लिए सभी पाठकों के सामने ला खडा किया । प्रस्तुत काव्य ग्रन्थ अपने पाठकों के हाथो मे देकर मैं निर्श्चित हूँ। मुझे विश्वास है जेन-धर्म के स्वीकृत सिद्धान्तो के आधार पर निर्मित यह ग्रन्थ पाठक प्रेमियो मे एक नई प्रेरणा और शक्ति देने मे समयथे होगा -- ज्योति. शुर पुरस्कृधि (हे वीर आगे हमे ज्योति प्रदान करो) --चारुचन्द्र द्विवेदी ६ जुलाई १९७३ प्रवक्ता हिन्दी-विशाग कला एव वाणिज्य महाविद्यालय खुरई सागर (म० प्र०)




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