चिरंतन | Chirantan
श्रेणी : काव्य / Poetry
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1.2 MB
कुल पष्ठ :
68
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
![कुलवंत सिंह - Kulwant Singh](https://epustakalay.com/wp-content/uploads/2019/08/kulwant-singh.jpg?height=150)
जन्म : 11 जनवरी, रुडकी, उत्तराखंड
प्राध्यमिक शिक्षा : सरस्वती शिशु शिक्षा मंदिर करनैलगंज गोंडा (उ.प्र.)
हाईकल / इंटरमीडिएट : ब्राम्हण संस्कृत विद्यालय, रुडकी
उच्च शिक्षा : बी टेक, आई. आई .टी. , रुडकी (रज़त पदक एवं 3 अन्य पदक)
पी एच डी : मुंबई युनिवर्सिटी
रचनाएं प्रकाशित : साहित्यिक पत्रिकाओं, परमाणु ऊर्जा विभाग, राजभाषा विभाग, केंद्र सरकार की गृह पत्रिकाओं, वैज्ञानिक, विज्ञान, आविष्कार,
अंतरजाल पत्रिकाओं में साहित्यिक एवं वैज्ञानिक रचनाएँ ।
पुस्तकें :
1- परमाणु एवं विकास (अनुवाद)
2. - विज्ञान प्रश्न मंच
3 - कण क्षेपण (विज्ञान) अप्रकाशित
काव्य पुस्तकें :
1 - निकुंज (काव्य अंग्रह)
2 - शही
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)वंदना (माँ शारदा की)
वर दे... वर दें... वर दे । शतदल अंक शोभित वर दें।
मधुर मनोहर वीणा लहरी, राग स्रोत की छटा है हरी, कण कण आभा अरुण सुनहरी, तान हृदय में परिमित गहरी । उर में मेरे करुण भाव भर दे।
वर दे ... वर दे .. वर दे। शतदल अंक शोभित वर दे ।
तरू दल पर किसलय डोले,
पीहू पीहूं पपीहा बोले, मनय तरंगित नै हिंडोले, आशीष शारदा मन पट खोले । काव्य किलोल कर मधुरिम कर दें।
वर दें ... वर दे .. वर दे । शतदल अंक शोभित वर दें।
दविज विस्मित कलरव विस्मृत, सुरभि मंजरी दिगंत विस्तृत,
नाचे मयूर झूमें प्रकृति, अंब वागेश्वरी संगीत निनादित । गीतों में मेरे रस द ताल भर दें।
वर दे... वर ६ . वर दे । शतदल अंक शोभित वर दे ।
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