प्राकृत साहित्य का इतिहास | Prakrit Sahitya Ka Itihas

Prakrit Sahitya Ka Itihas by जगदीशचंद्र जैन - Jagdishchandra Jain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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४ आराधनासार ३१७ तत्त्वसार ३१८ दशनसार ३१९ भावसंग्रह . द२१ बुहतनय्वकऋ द्रन्‌ ज्ञानसार १? चसुनन्दिश्रावकराचार कर श्रुतस्कंघ द३ निंजात्मापक दे छेदपिण्ड श् भावत्रिभंगी १? ास्रवत्रिभगी दे २४ सिद्धान्तसार १ अंगपण्णत्ति ह कल्लाणालोयणा दे२६ ठादसीगाथा ११ छेदशास्र र्‌२७ पांचवां अध्याय आगमोत्तरकालीन जेनघर्म सम्बन्धी ... साहित्य इंसबी सनकी श्वीं शताब्दी से १०वीं शताब्दी तक देर८-३४५४ क सामान्यग्रन्थ... ३२८-३३० विशेषावश्यकभाष्य ......... ३२८ प्रबचनसारोद्धार दे दे ० विचारसारप्रकरण 29 ख दशंन-खंडन-मंडन ३३१-३३३ सम्मइपयरण के धम्मसंगदहणी ३३२ प्रचचनपरीक्षा हक उंत्सत्रखण्डन ३३३ युक्तिप्रबोधनाटक ग सिद्धान्त जीवसमास विशेषणवती विंशेतिविशिका साधंशतक भाषारहस्यप्रकरण घ कमेसिद्धान्त कम्मपयडि _ सयग पंचसंगह प्राचीन कमग्रन्थ नव्य कमंग्रन्थ योगविंशिका ड श्रावकाचार सावयपण्णत्ति सावयधम्मविहिं सम्यक्त्वसप्तति जीवानुशासन द्ादशकुलक पचंक्खाणसरूव चेइयवंदण-भास धम्मरयणपगरण घम्मविहिपयरण पयूषणादशशतक इयापथिकीषट्त्रिंशिका देवचंदनादिभाष्यत्रय संबोधसप्ततिका धम्मपरिक्खा पौषधघप्रकरण रेरेरे ३३-१९ ३४ देर दे उठे दे देश ३३४-३६८ दे३४ मै रे द




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