आयुर्वेदीय क्रिया शारीर | Ayurvediya Kiriya Sharir

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Ayurvediya Kiriya Sharir by रणजित देसाई - Ranjit Desaiवैद्य यादव जी विक्रम जी आचार्य - Vaidy Yadav Ji Vikram Ji Aacharya
लेखक : ,
पुस्तक का साइज़ : 47.3 MB
कुल पृष्ठ : 930
श्रेणी :
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रणजित देसाई - Ranjit Desai

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वैद्य यादव जी विक्रम जी आचार्य - Vaidy Yadav Ji Vikram Ji Aacharya

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चित्र-सूची चित्र पृष्ठ संख्या १-प्राणि कोष श्ब्प २-भ्रमीबा _ १५२ ३-भ्रमीबा हारा कवलन श्प्रदे ४-एक क्षत्र कण श्प्र्ढ प्र-मानव पुबीज १५७ ६-स्त्री बीज १४७ ७-फलन १४७ ८-कोषो का समविभजन १्भ्र्द €-कोषो का विषम विभजन १६० १०-गर्भ-वृद्धि का प्रारम्भिक क्रम १६४ ११-ख्रावी ग्रथियो के प्रकार ३१४ १२-कोष्ठ में स्थूलान्त्र की स्थिति तथा महास्रोत में भ्रन्न-संचार का समय ३२६ १३-मुख तथा ग्रीवा ३४३ १४-महा स्रोत का उदरगत भाग ३४७ १५-शयुद्रान्वोका चौडाई की दिशामे छेदन ३६० १६-दाँई श्रोर की लाला ग्रथियाँ तथा उनके स्रोत ३७१ १७-श्रासादाय तथा अन्य पाचक अवयव ३८४५ १८-झन्त- शुक्र तथा बहि शुक्र के उत्पादक कोष ३० १९ २०-घण्ठीकरण का परिणाम-मुर्गेपर ४३२ २१.२२ २३-बालक स्त्री तथा पुरुष में शिरके केशोकी स्थिति डे २४-उरो गुहा का चौडाई दिशासे छेदन ४५४५ २४५-हाथ तथा हथेली की रसायनियाँ ४७४ २६-दिर ग्रीवा तथा मध्यकाय (धड ) के ऊध्वे भाग की रसायनियाँ श्रौर रस ग्रथियाँ ४७७ २७ २८-छिराझ की कपाटिकाएँ .. ४७८ २९-रस कुल्याएँ तथा रसत्रपा ४८ ३०-वायु कोष प्र ३१-फूप्फुस में केशिकाश का- जाल. श्२४ ३२-३ ३-प्रर्वास-काल में इवास-पटल का सकोच प्र बन चित्र पुष्ठ संख्या ३४-हृदय तथा उससे सबद्ध वाहिनियां ५३१ ३५-केशिकाओ का जाल प््३ण् ३६-घमनी से हुमा रक्त स्राव कागज पर लिया गया ः भ््‌३७ ३७-दारीर की मासपेशियाँ सामने की आर से पुर ३९-इच्छाधीन मास के सूत्र पद ४०-स्वतन्त्र मांस के सूत्र ४३ ४१-अस्थिपजर प्रूद्ड ४२-अ्रस्थियो का घन सघात शुषिर संघात तथा मज्जा विवर श्द्द ४३-चार प्रकार के दन्त फ्रु७० ४४-दुक्त-वह स्रोतसे बनी खण्डिकाएँ अधिवृषणिका शुक्रवाहिनी भ्७€ ४४-त्वचाका गहराईकी दिशामे छेंदन ४८८ ४द-स्तन भ्€ ४७-स्त्री-जननावयव ६०३ ४प८-मूत्रयन्त्र (वृक्क गवीनियाँ तथा मूत्रा- शय ) पीछे की श्रोर से ६१८ ४€-एक श्रान्त्र ( मूत्र निर्माण करने वाली प्रणाली ) का झादि भाग ६१९ ४्ु०-दो श्रान्त्र ६२० श५१-विविध जीवाणु ६३६ प्रुर-नाडी-कोष ७३७ श३-मस्तुलुज्जपिंड के विविध भाग ७३८ शु४-मस्तिष्क की सीताएँ तथा विविध ज्ञानो के और विभिन्न झवयवों को काये करने की प्रेरणा- देनेवाले केन्द्र ७३९ प्र भु--दास्त्रकर्म ह्वारा घस्मिल्लक निकालने के पदचात्‌ कवूतर--शरीर की समतुला बैलेन्स-से रहित ७४० पु६-मस्तिष्क का अझधघोभाग-नीप॑ण्य नाडियो के निर्गम स्थान ७४१ प्रु७-सुषुम्णा का छेदन चौडाई की दिया में 9४२




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