अवधी और उसका साहित्य | Avadhi Aur Uska Sahitya
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutKshemchandraSuman'
Add Infomation AboutTrilokinarayan Dikshit
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8.57 MB
कुल पष्ठ :
140
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :
क्षेमचंद्र 'सुमन'- Kshemchandra 'Suman'
No Information available about क्षेमचंद्र 'सुमन'- Kshemchandra 'Suman'
त्रिलोकीनारायण दीक्षित - Trilokinarayan Dikshit
No Information available about त्रिलोकीनारायण दीक्षित - Trilokinarayan Dikshit
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)श्द श्रवंधी श्रौर उसका साहित्य १ अर एवं रा के स्थान पर अवधी बोली में इ होती है और त्रज में य होता है । २. पछाँही हिन्दी में इ श्र उ के स्थान पर य श्र व होता है | ३. पछाँही हिन्दी से ऐ? श्र और संस्कृत-उच्चारण क्रमशः विलीन हो गए । अवधी मैं यह उच्चारण वर्तमान काल में भी उपलब्ध होता है । ४. झअवधी मैं दो अथवा दो से झ्धिक व्णों वाले शब्दों के श्रादि में इू? और उ के अनन्तर रा का उच्चारण प्रचलित है। परन्तु यह विशे- घता पछाँही हिन्दी में ष्टिगत नहीं होती । उदाहरणा थ-- सियार (श्रवधी) तथा प्यार (पछाँही हिन्दी) । ५. ्वधी माषा की प्रवृत्ति सामान्यतया लव्वन्त की श्र है त्और इसके विरुद्ध खड़ी बोली तथा ब्रज की दीर्घान्त के प्रति । ६. अवधी में साधारण क्रिया के रूप लब्वन्त होते हैं परन्तु पछाँदी हिन्दी मैं नकारान्त । उदाहरणाथ--अवधी मैं जाब चलब दूयाब ल्याब होता हैं परन्तु ब्रज मैं जान चलन दिन लेन श्रादि रूप होते हैं । अवधी-व्याकेरणु का मुख्य अंग हैं उसके कारक-च्िह्न । अवधी के कारक- चिह्न खड़ी बोली श्र ब्रज से मिन्न हैं । निम्न लिखित तालिका से इन तीनों बोलियों के कारक-चिह्न स्पष्ट हो जाते हैँ-- संख्या कारक... खड़ी बोली व्रजमाषा .... अवधी श् कता कसम डक कोई घि शेष न्चि ह्व नहीं है ० 2] को लिए खातिर तई कं व ्र कु के हि हि कहूँ के को ३. करण. ने द्वारा से... नें... सन से सौ ४... सस्प्रदान.. को लिए खातिर तई को कूँ कूँ क फहेँ के
User Reviews
No Reviews | Add Yours...