हास्य रस की कहानियां | Haasy Ras Kii Kahaaniyaan

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Haasy Ras Kii Kahaaniyaan by आर. सहगल - R. Sahgal
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 15.15 MB
कुल पृष्ठ : 344
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आर. सहगल - R. Sahgal

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ग्यारह त्था स्फूर्ति मिलगा इसका अनुमान लगाना कठिन न होगा । विनोद व्यज्ञ ओर हाय का मनुष्य के जीवन में क्या और केला स्थान रदता है यह हमारे दौनिक जीवन अध्ययन करने पर भमली प्रकार जाना जा सकता है । अच्छे ओर सुनमे हुए व्यज् से मनुष्य के मन म ्तिष्क और शरीर पर ऐसा चमत्कार्पूण प्रभाव पड़ता है कि जिससे नई चेतना श्र स्फूरति आ जाती है । निद्रा छोर आराम से शरीर वी थकान दूर की जाती है परन्तु हास्य मन मस्तिष्क आर शरीर को मुर्माने नहीं देता । दस्य के मी अंग हैं -मन्द मुस्कान मुस्कान श्रार खिलखिला कर हम्ना तथा यह मन. मस्तिष्क ओर शरीर पर अपना प्रभाव डालते हैं । भद्दा व्यड्र चोट करना या खिल्‍ला उड़ाना हास्य नह्दीं यह ता दर घ झा मनमताव का कारण बन सकता है । व्यज्व वहीं है . चाट फिए जाने पर भी चोट मालूम न दे और आदमी मुस्काने या खिल खला कर हंसने पर मजबूत हो जाए । फब्ती कसने श्रौर चुटकी काटने का ढंग हमारे हिन्दी के हास्य लिखने वालों को धवर्गीय जॉजे बर्नाडे शॉ की कृतियों से सीखना चाहिए तर देखना चाहिए कि सुन्दर आर चुभता हुआ व्यद् कैसे किया जाता हूं उच्छड्ललता और द्ास्य में बड़ा अन्तर है । प्गड़ी उछ लने श्औौर मार्मिक एवं शिष्ट व्यज्ञ करने में तथा व ५ त्मक चोट करने मे दिन और रात का झम्तर है. दि हमारे हाय-रस के लेखक इन बातों क




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