क्षत्रिय वंश प्रदीप | Kshatriya Vansh Pradeep
श्रेणी : समकालीन / Contemporary, साहित्य / Literature
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ :
331.79 MB
कुल पृष्ठ :
469
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( छिपअन्वेषण में लगे रहे, सभावों के जलसों व झन्य मेसितिकनोसुसलिमों से हमे झन्वेघणु करते ही रहते थे इस तरह इसहै कि यदद अन्थ देश के लिये उपयोगी सिद्ध हो, तदजुसार
इस श्रत्थ में प्रत्येक चात्रिय वंश का ादि इतिहास देकर उन
के सुसलमान किये जाने को घटनाओं का वर्सेन किया है साथ
ही में उनकी रीति भाँति चाल ढाल और रहन सहन, खानबम पान व उनको जिलसेवार लोकसंख्या थी बततलादी हे जिससेयह श्रन्थ हिन्डु महासभा तथा म.रतीय शुद्धि सभा व झाय्य
समाजिययों के थी कामे का बन गया है ।.जातियों को. लिख देना चाहा था पर यह अ्न्थ अजुमानलेकर भर तक की जातियें ही झासको हू शेषमें देने का उद्योग करेंगे ।
हमने हरेक जातियों सपा 82८०प्र् वहाबादशाहों समय में जबरन मुसलमान बना लियेयह उपरोक्त बिचण जो दम ठिख झाये हैं आज से दस
चथ चूव को चाता हे तब से दम प्रायः नौमुसलिम जातियों केकाय्यवशात जहाँ कहीं इस जाते थे वहाँ के दिन्दुओों से तथादस वष के समय में दसने बहुतसी नौसुसलिम जातियों.
का विवणु संग्रह किया है। यह सब कुछ करने का यह उद्देश्य.देमने इस अन्थ में अ से लेकर ज्ञ तक की
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नामुसलिस जातियों को छोड़ दियीं थी उनको भी दूखरे भाग.:.. परफसागत सम्बन्ध को देखकर निश्वय किया है कि इन सात
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सुसलमान नहीं है ये खब ही एक समय हिन्द थे ये लोगहे पं “नदी हज न कट रू” दि न कि कक 2 व नर कि पक लि मे री कला ला की पक रे कक मु कक निकट न मर 5 कक न की न
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