संस्कृत साहित्य का इतिहास | History Of Sanskrit Literature

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[ ज ]साहित्य का सम्पूर्ण विवरण देना सम्सब न हो सका । संस्कृत वाड्यय का यइ विभाग साधारण पाठक के लिये भी अत्यन्त उपादेय सामग्री से सुप्तम्पन्न है; तन्रापि; आशा है; परिशिष्ट में दिया हुआ संक्षिप्त बिवरण भी अध्येता को तत्तद्विषय पर प्रामाणिक ग्रन्थों से अधिकांश परिचय करा देने के लिये पयोप्र सिंद्ध होगा |प्रकृत ग्रन्थ के अन्त में सन्द्-प्रन्थों का उल्लेख किया है। यह सूची संक्षिप्त होते हुए भी पाठक की अपेक्षित जानकारी के लिये' पयांप्र है -- यथा; सम्भावित तिथियों के लिये प्रमाण; जिनका मूल अन्थ में यत्र-तत्र सकतमात्र संक्ेप में दिया गया है. |संस्क्रत साहित्य के इतिहास पर प्रस्तुत श्रन्थ की रचना करते समय मैंने संस्कृत साहित्य में प्रतिबिम्बित. प्राचीन भारतीय जीवन एवं विचारधारा की ओर विशेष ध्यान दिया है. जो, सस्भवतः; युरोपीय साहित्य के इतिहास लिखने सें इतना आवश्यक प्रतीत न होता | इसका कारण कुछ तो यह है. कि संस्कृत साहित्य पाश्चात्य सभ्यता से अत्यन्त विविक्त सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है; अत्त एवं इतर साहित्य की अपेक्षा कहीं अधिक तत्‌-प्रतिंबिस्बित जीवन एवं विचारधारा के सुस्पष्ठ विवरण की आवश्यकता रखता है. । इसके अतिरिक्त एक और कारण यह भी है कि भारतीय संस्कृति की एक सबिशेप रूप से अन्लुस्यूत परम्परा चली आ रही है जिसके आधार पर वत्तमान भारत की धार्मिक एवं सामाजिक मान्यताएँ अतीत की सनातन सरणि की प्रतीक हैं ।आचायें मेक्स म्यूलर तथा वेबर के उपयुक्त प्रबन्धों के अतिरिक्त मैंने एल- फ्रन्‌- श्रेडर के अस्युत्तम प्रबन्ध; 'इण्डियेन्स लिटराटुर उण्ठ कुदटुर” का प्रचुर मात्रा में उपयोग किया है। साथ ही साथ; परिशिष्ट [क,मेंदी हुई सन्दभ सूची में उल्लिखित समस्त अन्थों से मैंने किसी न किसी रूप सें लाभ अवश्य लिया है। शेष; जो भी कुछ मैंने' प्रस्तुत म्न्थ में' लिखा है; संस्कृत साहित्य के मेरे व्यक्तिगत अध्ययनपर आधारित है. | 2




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